जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में ‘बचपन छीनता बालश्रम’ विषय पर सेमिनार में उपस्थित छात्राएं।
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बस्ती। डायट की प्राचार्य संध्या श्रीवास्तव ने कहा कि बाल श्रम समाज के लिए अभिशाप है। इसके चलते देश के हजारों बच्चों का बचपन बर्बाद हो रहा है। बच्चे शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित हो रहे हैं। इस अभिशाप को समाप्त करने के लिए समाज के सभी नागरिकों को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा।
वह जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान बस्ती में बृहस्पतिवार को ‘बचपन छीनता बालश्रम’ विषय पर सेमिनार को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने शिक्षक डॉक्टर सर्वेष्ट मिश्र के बाल श्रमिकों की शिक्षा से जुड़े रहने पर उनकी सराहना की और कहा कि उनके इस पुनीत कार्य में डायट की ओर से पूरा सहयोग किया जाएगा। डॉक्टर सर्वेष्ट मिश्र ने बाल श्रमिकों की शिक्षा पर बेहतरीन काम करने वाले वाले नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी और मलाला यूसुफजई के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने मलाला के वक्तव्य ‘एक कलम, एक पुस्तक, एक बच्चा और एक शिक्षक पूरी दुनिया बदल सकता है’ की जानकारी देते हुए बस्ती के गरीब बस्तियों, दुकानों, निर्माण स्थलों और मलिन बस्तियों में रहने और काम करने वाले बाल श्रमिकों के लिए अपनी प्रस्तावित शिक्षा योजना की जानकारी दी।
सेमिनार की संयोजक सुमन रानी मिश्र ने बाल श्रम और उसके विविध रूपों पर अपने विचार रखा। एबीआरसी डॉक्टर राम शंकर पांडेय ने इसमें शिक्षकों की भूमिका पर अपनी बात रखी। प्रवक्ता प्रत्युष श्रीवास्तव, राम कृष्ण ओझा, चंद्रावती, ज्ञानदास ने भी अपने विचार व्यक्त किए। प्रशिक्षु रिंकी, अभिनव त्रिपाठी, एकता त्रिपाठी, हर्षिता शर्मा, शालिनी वर्मा, नेहा मिश्रा और यशोदा नंदन पांडेय ने बालश्रम के विभिन्न कारणों और उसके निदान के उपायों, बालश्रम कानूनों के बारे में अपने विचार व्यक्त किए। डायट परिसर में सेमिनार का संचालन राम कृष्ण ओझा ने किया।