ब्लॉक क्षेत्र की डेढ़ लाख की आबादी केे स्वास्थ्य का जिम्मा सीएचसी ढो रहा है। संसाधनों के अभाव में बदहाली के शिकार इस अस्पताल में मुख्य मार्ग पर हल्की सी बारिश में भी आवागमन मुश्किल हो जाता है।
शनिवार की सुबह आठ बजे अमर उजाला की टीम अस्पताल पहुंची। रास्ते पर पानी भरा था। यही हाल अस्पताल परिसर का भी है। ओपीडी में डॉ. प्रदीप व लैब तकनीशियन विक्रम मौजूद थे, मगर अन्य कर्मी नदारद मिले। दवा वितरण कक्ष, स्टाफ रूम, स्टोर रूम, होम्योपैथिक चिकित्सा कक्ष व दंत चिकित्सा कक्ष पर ताला लटकता पाया गया, जबकि प्रसव कक्ष में एएनएम प्रिया मौजूद थीं। तीस शैय्यायुक्त स्वास्थ्य केंद्र पर प्रभारी चिकित्साधिकारी सहित कुल चार चिकित्सक डॉ. राजेंद्र प्रसाद जायसवाल, डॉ. प्रदीप, डॉ. किरन व एक अन्य चिकित्सक की तैनाती है। सीएचसी प्रभारी डॉ. राजेंद्र की नाइट ड्यूटी थी, लेकिन दो अन्य डॉक्टर नहीं पहुंचे। तीन फार्मासिस्टों में से एक मौजूद मिले बाकी दो की अनुपस्थिति का कारण अवकाश पर होना बताया गया। परिसर में सिर्फ एक हैंडपंप है, जो दूषित पानी उगल रहा है। इसकी चौकी भी अब तक नहीं बन सकी है। शुद्ध पेयजल के लिए आरओ मशीन स्थापित तो है, मगर यहां अंधेरा होने की वजह से जरूरतमंद यहां जाते ही नहीं। दांत रोग की मशीन तो स्थापित है, मगर डॉक्टर नहीं हैं। तीस शैय्या सीएचसी पर केवल बीस बेड ही संचालित हैं। सीएचसी प्रभारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद जायसवाल ने बताया कि रास्ते के लिये डीएम व एसडीएम को लिखित शिकायत की गयी लेकिन मामला कोर्ट में होने के चलते रास्ता नहीं बन सका है। चूंकि शनिवार होने की वजह से अधिकतर कर्मचारी अवकाश पर हैं जो बिना सूचना के ही गायब हैं उन पर कार्रवाई होगी। जहां तक अस्पताल की समस्या का सवाल है तो सब कुछ उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। उपलब्ध संसाधनों में बेहतर सेवा देने का प्रयास किया जा रहा है।