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Basti News: कटान का कोहराम... तटबंध बना सहारा

Fri, 30 Aug 2024 04:26 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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सरयू ने मचाई मईपुर और मदरहवा गांव में तबाही, लगातार उजड़ रही आबादी
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किराये के मकान और रिश्तेदार के यहां शरण ले रहे बाढ़ प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
गायघाट (बस्ती) सदर तहसील के बैराड़ी एहतमाली के मईपुर और मदरहवा गांव में सरयू नदी के कटान से कोहराम मचा हुआ है। बृहस्पतिवार तक इन गांवों के 150 लोग अपने घर-बार खाली कर शरणार्थी बनने को मजबूर हो गए हैं। नदी गांव तक पहुंच चुकी है। आबादी क्षेत्र में कटान कर रही है। इससे तबाही मची हुई है।
बाढ़ प्रभावित गृहस्थी के सामान को रिश्तेदारों के यहां पहुंचा रहे हैं। कुछ लोग कस्बे में किराये का मकान लेकर सामान सुरक्षित कर रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर लोग कलवारी-रामपुर तटबंध पर खुले आसमान के नीचे गुजर-बसर करने को मजबूर हैं। पन्नी तानकर इनका जीवन यापन हो रहा है। मवेशी और मनुष्य एक साथ रहने को विवश हैं।
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विजय कुमार और उनकी पत्नी मंजू, हरिहर प्रसाद तटबंध पर पन्नी तानकर गुजर-बसर करते हुए मिले। मंजू ने बताया कि कटान की डर से घर खाली कर दिया है। परिवार सहित तटबंध पर रहने को मजबूर हैं। प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं पहुंचाई गई है। रात में बारिश के समय परिवार के सभी 10 सदस्यों ने बैठकर समय बिताया। मईपुर के श्रीकिशन यादव और उनकी पत्नी प्रियंका यादव दोनों दिव्यांग हैं। बताया कि कटान की डर से सामान बैराड़ी में अपने भाई के घर रख दिया है।
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प्रभु राम पासवान ने बताया कि मईपुर तटबंध लिंक मार्ग से सरयू नदी की कटान करीब 50 मीटर दूर है। मईपुर गांव से निकलने का यही एक मात्र सड़क है। सड़क कट जाने पर गांव के लोगों का निकलना मुश्किल हो जाएगा। इसके डर से लोग अपने घरों से सामान निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंच रहे हैं। मदरहवा पुरवा के रामभवन पासवान की छप्पर की झोपड़ी सरयू नदी की कटान में विलीन हो चुकी है। वह प्राथमिक विद्यालय में बनाए गए राहत शिविर में शरण लिए हुए हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन की ओर से कोई सहायता नहीं दी जा रही है। मईपुर निवासी 65 वर्षीय बुजुर्ग त्रिभुवन यादव ने बताया कि लगभग 45 साल पहले इस तरह की कटान देखने को मिली थी। लेकिन, इस बार उससे अधिक नदी का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। बाढ़ खंड द्वारा नदी की धारा मोड़ने के लिए कराए गए अधूरे ड्रेजिंग के कारण सरयू नदी की धारा गांव की तरफ रूख कर गई है। जिससे गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। हालांकि बृहस्पतिवार को कटान में कमी आई है। नदी का जलस्तर घटने से भी लोग राहत महसूस किए हैं।
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