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Basti News: जालसाजी करके जमानत की एफडी भुनाने पर चेयरमैन ने कराया केस

Fri, 01 Aug 2025 02:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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हर्रैया। नगर पंचायत के चेयरमैन कौशलेंद्र प्रताप सिंह राजू ने मानव संसाधन उपलब्ध कराने वाली संस्था लक्ष्य फाउंडेशन के प्रोपराइटर आदित्य श्रीवास्तव पर निविदा के समय बंधक जमानत राशि का राष्ट्रीय बचत पत्र बिना नोड्यूज कराए फर्जी अभिलेख तैयार कर निकाल लिए जाने का केस केस दर्ज कराया है। एक वर्ष पुराने मामले में पुलिस केस दर्ज कर जांच पड़ताल में जुट गई है।
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नगर पंचायत में मानव संसाधन उपलब्ध कराए जाने का ठेका लक्ष्य फाउंडेशन रौतापार को वर्ष 2020-2023 तक के लिए मिला था। निविदा के समय जमानत राशि के रूप में संस्था की तरफ से केनरा बैंक से जारी आठ लाख पच्चीस हजार पांच सौ रुपये का एफडी अधिशाषी अधिकारी नगर पंचायत हर्रैया के पक्ष में बंधक दिया गया था। ऑडिट के समय लक्ष्य फाउंडेशन पर अनियमितता पाई जाने पर लेखा परीक्षण अधिकारी द्वारा जमानत की धनराशि जब्त किए जाने की सिफारिश की गई थी। निविदा अवधि समाप्त होने के बाद नगर पंचायत द्वारा जमानत राशि अवमुक्त नहीं की गई।
इसी बीच अनुबंध खत्म होने पर लक्ष्य फाउंडेशन के प्रोपराइटर आदित्य श्रीवास्तव निवासी रौतापार बस्ती ने एफडी गायब होने की सूचना देकर दर्ज एफआईआर की कापी व बयान हल्फी बैंक में प्रस्तुत कर ईओ के पक्ष में बंधक धनराशि का भुगतान 29 अगस्त 2024 को अपने खाते में करा लिया। एफडीआर गायब होने की झूठी सूचना देकर केस दर्ज कराने व बिना नोड्यूज के जमानत राशि निकालने के बारे में जानकारी मिलने पर पहले अधिशाषी अधिकारी ने पुलिस विभागीय अधिकारियों को सूचना देकर कार्रवाई की मांग की मगर कार्रवाई नहीं हुई। अब चेयरमैन कौशलेंद्र प्रताप सिंह के शिकायती पत्र में पूर्व में हुए पत्राचार को संज्ञान में लेकर पुलिस ने आरोपी संस्था के प्रोपराइटर पर धोखाधड़ी सहित अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। इस संबंध में प्रभारी निरीक्षक तहसीलदार सिंह ने बताया कि केस दर्ज हुआ है। पुलिस आरोपों के बारे में साक्ष्य जुटा रही है।
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लक्ष्य फाउंडेशन के प्रोपराइटर आदित्य श्रीवास्तव ने कहा कि जमानत राशि अवमुक्त किए जाने के बारे में पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया है। जिस जमानत राशि को नगर पंचायत ने रोकने का जिक्र पुलिस को दिए प्रार्थनापत्र में किया है उस कार्य का टेंडर हमारी फर्म को मिला ही नहीं था। इसलिए उस कार्य के जमानत के सापेक्ष लगाए गए एफडी आर/टीडीआर को नगर पंचायत को एक माह में वापस कर देना था।
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