बस्ती। ओपेक चिकित्सालय कैली को आखिरकार राज्य सरकार ने मेडिकल कॉलेज का दर्जा दे दिया। 25 जून को कैली के सीएमएस डॉ. सोमेश चंद्र श्रीवास्तव के प्रस्ताव पर राज्य सरकार ने सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इसके बाद केंद्र से वार्ता के बाद पांच जुलाई को प्रमुख सचिव डॉ. रजनीश दूबे ने स्वीकृति पत्र डीएम और महानिदेशक कैली को भेज दिया है।
केंद्र सहायतित योजना फेज वन के अंतर्गत जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज का दर्जा दिए जाने की व्यवस्था बनाई गई थी। इसके बाद उच्चाधिकारियों सहित तकनीकी टीम ने यहां कई दौरे किए, मगर जिला अस्पताल में जगह न होने के कारण इसे लेकर सवाल उठने लगे थे। हालांकि, मेडिकल कॉलेज की घोषणा के बाद से ही यह कयास लगाए जाने लगे थे कि ओपेक चिकित्सालय कैली को ही मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिलेगा, मगर तकनीकी कारणों से ऐसा संभव नहीं हो पा रहा था। नतीजतन, जिला अस्पताल को उच्चीकृत करने की कवायद शुरू होने लगी। जून में दौरे पर बस्ती आए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह से सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा ने कैली को मेडिकल कॉलेज का दर्जा देने की बात तर्कपूर्ण ढंग से रखी, जिस पर मंत्री ने प्रयास करने का आश्वासन दिया। इसी बीच कैली के सीएमएस पद पर डॉ. सोमेश की तैनाती हुई और उन्होंने प्रयास के क्रम में प्रस्ताव बनाया और शासन में बैठक के दौरान प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति ले ली। मामला केंद्र के पास पहुंचा तो तकनीकी दिक्कतों को दूर करते हुए केंद्र सरकार ने प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी। निदेशक कैली को भेजे पत्र में प्रमुख सचिव ने कहा है कि प्रथम चरण में राजकीय मेडिकल कॉलेज में शामिल बस्ती को अब जिला अस्पताल के बजाय रेफरल अस्पताल ओपेक चिकित्सालय कैली में पांच सौ शैय्या अतिरिक्त भूमि की उपलब्धता के क्रम में इस अस्पताल को उच्चीकृत किया जाए। ओपेक चिकित्सालय कैली के सीएमएस डॉ. सोमेश चंद्र ने कहा कि शासन का पत्र प्राप्त हो गया है। कैली को राजकीय मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिला है। इस अस्पताल में अब संसाधनों आदि का भरपूर उपयोग किया जा सकेगा।