गौर (बस्ती)। थाना क्षेत्र के बिरऊपुर चौराहे पर पांच जून को दरिंदगी की शिकार हुई 14 वर्षीय किशोरी का परिवार आज भी न्याय की गुहार लगा रहे हैं। पुलिस ने मुख्य आरोपी कुंदन सिंह के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स के बिना न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दिया है। इसे लेकर मृतका के परिवार ने हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए दो सप्ताह के भीतर आरोपी के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल को विवेचना में शामिल करने के निर्देश दिए हैं।
गौर थाना के एक गांव की छठवीं कक्षा में पढ़ने वाली 1किशोरी के पिता न्याय के लिए पुलिस अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। मृतका के पिता ने बताया कि छह माह से अधिक का समय बीत गया, लेकिन पुलिस ने दुष्कर्म और हत्या के आरोपी कुंदन सिंह के मोबाइल फोन के कॉल डिटेल को विवेचना में शामिल नहीं किया। जबकि कॉल डिटेल के लिए घटना के विवेचक रहे एसएचओ परसरामपुर व एसपी से मिलकर न्याय की गुहार लगाई। एसएचओ गौर उपेंद्र कुमार मिश्र ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देश का पालन करते हुए मोबाइल कॉल डिटेल को विवेचना में शामिल कर दिया गया है।
इस तरह किशोरी के साथ हुई थी दरिंदगी
घर से साइकिल लेकर सब्जी लाने के लिए निकली गौर थाना क्षेत्र की 14 वर्षीय किशोरी का एक किमी दूर बिरऊपुर चौराहे पर पांच जून को खून से लथपथ शव मिला था। पोस्टमार्टम में उसके साथ दरिंदगी की बात सामने आई थी। सूचना पर पहुंचे परिवार के लोग जिंदा होने की उम्मीद में पास के एक निजी डॉक्टर के पास ले गए। डॉक्टर ने बताया कि उसकी करीब एक घंटे पहले ही मौत हो चुकी है। इसके बाद परिवार के लोग शव लेकर घर चले गए। पोस्टमार्टम में अप्राकृतिक दुष्कर्म की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने केस में नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म और पाॅक्सो की धारा को शामिल किया। इस मामले में राजन निषाद, कुंदन सिंह और एक नाबालिग आरोपी जेल में है।
कब चलेगा कुंदन के मकान पर बुलडोजर
किशोरी से दरिंदगी की घटना जिस मकान में हुई थी, वहां पुलिस को अवैध शराब का जखीरा मिला था। उस समय पुलिस ने मकान को सील करते हुए पैमाइश कराया तो आधा मकान चकरोड में बना पाया गया था। परिवार के लोग आरोपी कुंदन सिंह के उक्त मकान पर बुलडोजर चलाने की मांग कर रहे थे। यहां तक की लोगों ने बिरऊपुर चौराहे पर प्रदर्शन भी किया था। तत्कालीन एसडीएम हर्रैया गुलाब चंद ने नायब तहसीलदार गौर निखिलेश चौधरी व लेखपालों की टीम गठित कर पैमाइश कराया और स्थलीय सत्यापन कराया था। फिर भी कार्रवाई नहीं हुई।
नहीं मिला रानी लक्ष्मीबाई सम्मान योजना से सहायता
परिवार वालों को प्रदेश सरकार से अनुमन्य रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष से अब तक कोई मदद नहीं मिली। जबकि पूर्व विधायक संजय प्रताप जायसवाल ने उसे समय घटना को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर पीड़िता के परिवार को रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष से मदद दिलाने की मांग की थी। इस योजना में जघन्य अपराधों से पीड़ित महिलाओं, बालिकाओं के परिवारी जन को तीन से दस लाख रुपये का लाभ देने का प्रावधान है।