बस्ती। रोडवेज डिपो के वर्कशॉप का उच्चीकरण न होने से करीब बीस साल से बसें गंदगी के बीच आवागमन कर रही हैं। यह हालत हर मौसम में बनी रहती है। समस्या के समाधान के प्रति परिवहन निगम के अधिकारी भी गंभीर नहीं दिख रहे हैं। लिहाजा बसें धुलाई सेंटर व डीजल शेड तक कीचड़ व जलभराव के बीच से गुजरती हैं।
बस्ती डिपो की स्थापना वर्ष 1965 में हुई थी। यहां बस स्टेशन व वर्कशॉप अगल-बगल हैं। धीरे-धीरे रोडवेज के आसपास आबादी बसती चली गई। चारों ओर से यह पूरा स्टेशन व वर्कशॉप ऊंची-ऊंची इमारतों से घिर गया। परिसर से बाहर लोगों ने अपने मकान ऊंची बुनियाद भर कर बनवा लिए और यहां की जलनिकासी बाधित होने लगी। करीब 20 साल से यह स्थिति हो गई है कि यहां से पानी बाहर निकलने के सारे रास्ते बंद हो गए हैं और हर मौसम में जलभराव की स्थिति बनी रहती है। इसका बड़ा कारण यह है कि यहां स्थापित ऑटोमेटिक वाॅशिंग पिट पर बेड़े में शामिल 123 बसों की धुलाई होती है और उसका पानी भी बाहर निकल पाता है।
पांच साल पहले शुरू हुई थी सुधारने की कवायद
पांच साल पहले परिवहन निगम मुख्यालय से अपने पैतृक गांव बस्ती के गाना-कुदरहा आए अपर प्रबंध निदेशक आईएएस ब्रह्मदेव राम तिवारी ने इसे गंभीरता से लिया था और 19 करोड़ रुपये से उच्चीकरण व सुंदरीकरण का प्रस्ताव तैयार करवाया, लेकिन समय बीतता गया और वह जिला व मंडल प्रशासन के कार्यों में व्यस्त हो गए। नतीजतन पूरी योजना फाइलों में दब गई। करीब तीन साल पहले तत्कालीन एआरएम आरपी सिंह ने पहल कर वर्कशॉप परिसर में कुछ ईंट के रोड़े डलवा दिए और पुराने प्रशासनिक भवन को ध्वस्त करवा दिया, लेकिन इसी बीच वह सेवानिवृत्त हो गए। उसके बाद न तो मुख्यालय ने गंभीरता दिखाई और न ही कार्य आगे बढ़ सका।
कार्यशाला की समस्या को उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाया गया है। जल्द ही समस्या का समाधान मुख्यालय स्तर से किया जाएगा।
-चंदन लाल, सीनियर फोरमैन, वर्कशॉप