मुंडेरवा क्षेत्र में खेत में जलाई जा रही पराली। संवाद
बस्ती। धान की फसल की कटाई शुरू हो चुकी हैं। कंबाइन मशीनों से खेतों को फसल से खाली किया जा रहा है। मगर, पराली के प्रबंधन का इंतजाम अधिकांश जगहों पर नहीं हैं। खेतों ूंमें फसल का अपशिष्ट छोड़ दिया जा रहा है। दो दिन धूप खाने के बाद उसे रात के समय आग के हवाले कर दिया जा रहा है। यह नजारा सड़कों से रात में हर तरफ देखने को मिल रहा है। खेत-खेत पराली जलाने से पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंच रहा है। वायुमंडल में प्रदूषण की वजह से बेसमय आसमान में धुओं की परत धुंध के रूप में दिख रही है। जहरीली हवाएं का प्रेषण जीव-जंतुओं से लेकर मानव शरीर में भी हो रहा है। यह हाल तब जबकि पराली जलाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा है। इसके लिए पुलिस और राजस्व टीम को निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है। मगर इसका अनुपालन अधिकांश जगहों पर नहीं हो रहा है। संवाद