फिजाओं में घुला पौने दो सौ क्विंटल बारूद, 252 लाइसेंसी पटाखों की दुकानों से औसतन बिका 50 किलो बारूद
तीन दिन में 142 से 177 पर पहुंच गया एक्यूआई इन्डेक्स
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। प्रदूषण पर अंकुश के लिए कम पटाखे जलाने की सीख धरी की धरी रह गई। दिवाली की शाम होते ही आसमान सतरंगी रॉकेट से पट गए। गली-मोहल्लों में रंग-बिरंगी फुलझड़ियां जलाई जाने लगीं। पटाखे जालने का सिलसिला पूरी रात चलता रहा। एक अनुमान के मुताबिक रविवार से लेकर मंगलवार के तीन दिन के बीच 12 करोड़ रुपये से अधिक कीमत के पटाखे जला दिए गए। करीब पौने दो सौ क्विंटल.बारूद का धुआं हवाओं में घुल चुका है। इस वजह से मंगलवार को सुबह सांस के रोगियों को दिक्कत महसूस हुई। शहर का एक्यूआई 145 से बढ़कर 177 पर पहुंच गया।
शहर में धूल के कण और वाहनों से निकले धुएं से दशहरा के बाद से ही प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है। लगातार 100 के आसपास रहने वाला एक्यूआई का स्तर 140 के पार तक पहुंचा हुआ था, लेकिन शनिवार से इसमें इजाफा होने लगा। शनिवार को 142 और रविवार की आधीरात के बाद 160 पहुंच गया। सोमवार को 170 और मंगलवार को 177 प्वाइंट पर जा पहुंचा। जानकार बताते हैं कि पिछले चार वर्षों में एयर क्वालिटी इंडेक्स इतने ऊपर कभी नहीं पहुंचा था। 2019 में 165 तक एक्यूआई पहुंचा था।
शिवहर्ष किसान पीजी काॅलेज के पूर्व प्राचार्य डाॅ. जेपी शुक्ल बताते हैं कि बारूद के द्वारा पर्यावरण में सूक्ष्म कणों की मात्रा ज्यादा हो जाती है और हानिकारक प्रदूषक जैसे की नाइट्रेट्स, सल्फर ऑक्साइड्स, क्लोराइड्स, अमोनिया के जल में घुलनशील आयन उत्पन्न होते है। साथ ही विभिन्न धातु जैसे की मैग्नीशियम, क्रोमियम, कैल्शियम, बेरियम जो की कैंसर जैसे रोगों के कारण होते है ये भी हानिकारक मात्रा में बढ़ जाती है। जल में घुलन शील होने के कारण इनका दीर्घ काल तक प्रभाव बना रहता है। अतिरिक्त मात्रा में कार्बन ब्लैक के उत्सर्जन से अस्थमा जैसे रोग के कारक बनते है।
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बढ़ गए एलर्जी, अस्थमा के मरीज
जिला अस्पताल के फिजिशियन डाॅ. दीपक चौरसिया के मुताबिक दीपावली के बाद हर वर्ष की तरह इस बार भी एलर्जी, अस्थमा के मरीज बढ़ गए हैं। असल में पटाखे जलाने पर उनसे गंधक और पोटैशियम नाइट्रेट समेत कई हानिकारक गैस निकलती है। एक साथ चारों तरफ इन गैसों की मात्रा बढ़ने से एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़ जाता है। जहरीली गैसों के चलते सांस लेने में दिक्क्त होने लगती है। सबसे अधिक परेशानी एलर्जी व अस्थमा मरीजों को होती है। शोर और प्रदूषण से तनाव होता है, जो ब्लड प्रेशर और शुगर के अलावा हृदय रोगियों के लिए हानिकारक है। अचानक तेज आवाज के पटाखे बजने पर हृदय रोगियों को जो झटका लगता है, इससे उनकी तबीयत बिगड़ने की आशंका बढ़ जाती है।
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गांव-गांव तक फैला पौने दो सौ क्विंटल बारूद
जिले में पटाखे बेचने के लिए 22 स्थायी लाइसेंसी पंजीकृत हैं। इसके अलावा 250 अस्थायी लाइसेंस जारी किए गए थे। इनमेंं सदर तहसील में 95, रुधौली में 40, भानपुर में 60 और हर्रैया तहसील क्षेत्र के 55 अस्थायी लाइसेंसी शामिल हैं। स्थायी लाइसेंसियों को 45 किलो बारूद और अस्थायी लाइसेंसियों को 15 किलोग्राम बारूद रखने की अनुमति थी। मगर, सभी ने मनमाने ढंग से अनुमति से ज्यादा स्टॉक जमा कर रखा हाो। इसके अलावा 100 से अधिक अवैध दुकानों पर पटाखे बिकते देखे गए। एक आकलन के मुताबिक औसतन 50 किलो बारूद प्रत्येक दुकानदार के पास से बिके। इस तरह से कम से कम पौने दो सौ क्विंटल बारूद के पटाखे शहर से लेकर गांव तक बिक गए। थोक में इतने बारूद की करीब चार करोड़ रुपये है। व्यापारी बताते हैं कि तीन से चार गुना की बचत है, यानी पटाखों की कीमत 12 करोड़ रुपये पहुंच जाएगी।
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हार्ट अटैक से बचने के घरेलू नुस्खे
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. सुशील श्रीवास्तव के मुताबिक, अस्थमा के अटैक से बचने के लिए पिपली चूर्ण एक ग्राम शहद के साथ सुबह खाली पेट रोजाना लें। इसके अलावा हरिद्राखंड पांच-पांच ग्राम दूध के साथ या गुनगुने पानी के साथ लें। एलर्जी हो तो आधी चम्मच अजवाइन और कलौजी बराबर मिलाकर एक कप पानी में एक मिनट तक उबालें और फिर उसे पी जाएं। यह सांस की नलियों को फैला देगा और सांस लेने में आसानी होगी। बिना दूध की चाय में तुलसी की पत्ती, काली मिर्च और अदरक मिलाकर पीने से भी काफी आराम मिलेगा।
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क्या करें अस्थमा रोगी
: दीपावली के बाद तीन दिन तक सुबह टहलने से बचें।
: शाम के बाद घर से निकलें तो गर्म कपड़े पहनें।
: अचानक तापमान बदलने से बचें।
: भाप जरूरी लें, चाहे पहले लेते रहे हों या नहीं।
: बच्चों का विशेष ध्यान रखें।
: अस्थमा के रोगी को जुकाम हो तो यह अटैक की चेतावनी है।
: हल्का खाना खएं और जल्दी सो जाएं।
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