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टूटे शीशे, फटी सीट है रोडवेज की पहचान

Sun, 25 Feb 2018 12:44 AM IST
बस्ती, उत्तर प्रदेश्ा
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ख्ाटारा बस - फोटो : बस्ती
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बस्ती। टूटे शीशे, फटी सीट, चलने पर गाड़ी से खट-खट की आवाज, यही रोडवेज के स्थानीय बसों की पहचान है। दूर की बसों में भी अधिकांश की स्थिति यही है। यात्री बसों की की स्थिति को लेकर कोसते रहते हैं। कब यात्रा के दौरान बस धोखा दे जाय कहा नहीं जा सकता। इसके बावजूद रोडवेज की बसों पर लोगों को प्राइवेट बसों से ज्यादा भरोसा रहता है। इसका कारण है कि रास्ते में धोखा देने पर तुरंत दूसरी बस में जाने की व्यवस्था हो जाती है। 
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 यात्रा के दौरान ठंड में जहां यात्री ठिठुरते हैं, वहीं गर्मी में उन्हें लू के झोंकों का भी सामना करना पड़ता है। यही नहीं वाराणसी, इलाहाबाद व लोकल के कई रूटों पर बसों की संख्या भी बेहद कम है। ऐसे में यात्रियों को परेशान होना पड़ता है। 

परिवहन निगम लोगों की यात्रा को सुगम करने के लिए पूरी ताकत लगाए हुए है। यहां निगम के बेडे़ में यूं तो खुद की 86 बसें हैं, मगर लोकल रुट को कवर करने के लिए निगम ने 17 बसों को अनुबंधित कर लिया है। जो निगम के समयानुसार आती जाती हैं। परिवहन निगम ने लांग रुट यानी दिल्ली, आगरा,मेरठ, कानपुर व लखनऊ तक की यात्रा के लिए 46 बसों को लगाया है। इसके अलावा एक बस वाराणसी व एक इलाहाबाद भी जाती है। 
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रोडवेज से लंबी दूरी के अलावा लोकल रूट के लिए हर रोज तकरीबन 12 से 13 हजार यात्रियों का विश्वास परिवहन निगम है। यह संख्या पर्व व त्योहारों पर बढ़ कर 17 से 18 हजार हो जाती है। इसीलिए निगम ऐसे अवसरों पर अतिरिक्त सुविधा मुहैया कराता है। 

निगम के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक परशुराम पांडेय ने कहा कि परिवहन निगम की सेवाओं पर आम लोगों का विश्वास है। सेवा को विस्तारित करने की दिशा में भी काम चल रहा है। आठ बसें तो पुरानी हैं, मगर उनका बेहतर रख रखाव किया जाता है, जिससे वे अभी सड़कों पर हैं। इसके अलावा जिन बसों को लोकल व लंबी दूरी पर संचालित किया जाता है उनको भी तकनीकी टीम की हरी झंडी के बाद ही सफर के लिए चलाया जाता है। होली पर अभी से तैयारी कर ली गई है। लंबी दूरी के लिए 25 अतिरिक्त बसें सोमवार से चलाई जाएंगी। 
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