बालगृहों को कोरोना से सुरक्षित रखने पर मंथन
बस्ती। महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत प्रदेश में संचालित 180 बाल गृहों में रह रहे सात हजार से ज्यादा बच्चों को कोरोना से सुरक्षित बनाने के लिए विभागीय कोविड वर्चुअल ग्रुप के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया।
बच्चों में कोरोना के लक्षणों और बचाव के तरीकों पर विषय विशेषज्ञों ने अपनी बात रखी। बालगृहों के कर्मियों के क्षमता वर्धन के लिए कोविड वर्चुअल ग्रुप के माध्यम से रविवार को आयोजित वेबिनार में बालगृहों की व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने की जरूरत पर जोर दिया गया।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एफ हुसैन के साथ ही स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी और स्टॉफ, यूनिसेफ के डीएमसी आलोक राय ने प्रतिभाग किया।
एसजीपीजीआई, लखनऊ की वरिष्ठ कंसलटेंट पीडियाट्रिशियन डॉ. पियाली भट्टाचार्य ने कहा कि इस समय बच्चों में कोई भी नए लक्षण नजर आएं तो उनको नजरंदाज न करें। बच्चों में डायरिया, उल्टी-दस्त, सर्दी, जुकाम, बुखार, खांसी, आंखें लाल होना या सिर व शरीर में दर्द होना, सांसों का तेज चलना आदि कोरोना के लक्षण हो सकते हैं। बच्चे को होम आइसोलेशन में रखें, किंतु बच्चा यदि पहले से अन्य बीमारियों की चपेट में रहा है और कोरोना के भी लक्षण नजर आते हैं तो उसे चिकित्सक के संपर्क में रखें।
डॉ. पियाली ने बाल गृह में रह रहे बच्चों का हेल्थ चार्ट बनाने पर जोर दिया और कहा कि यह चार्ट हर बालगृह अपने पास रखें और उसको नियमित रूप से भरते रहें। उसमें बुखार, पल्स रेट, ऑक्सीजन सेचुरेशन, खांसी, दस्त आदि का जिक्र है, जिससे पता चलता रहेगा कि बच्चे को कब आइसोलेट करने की जरूरत है या कब अस्पताल ले जाना है। बच्चा ज्यादा रोये, गुस्सा करे या गुमसुम रहे तो उस पर भी नजर रखनी है।
डॉ. पियाली ने कहा कि जैसी की चर्चा में है कि कोरोना की तीसरी लहर भी आ सकती है, जो बच्चों को ज्यादा प्रभावित कर सकती है, उस लिहाज से भी अभी वक्त है कि बच्चों में मॉस्क लगाने, सोशल डिस्टेंसिंग और हैंडवाश की आदत डाली जाए। तीसरी लहर सितंबर-अक्तूबर में आने की बात कही जा रही है। निदेशक, महिला कल्याण मनोज कुमार राय ने कहा कि कोविड-19 को देखते हुए बालगृहों में रह रहे बच्चों को पहले से ही विभिन्न आयु वर्ग में विभाजित कर उनके स्वास्थ्य की देखभाल की जा रही है।