तीन महीने तक नाव ही आवागमन का सहारा
दुबौलिया। सरयू नदी का जलस्तर दो दिन स्थिर रहने के बाद बुधवार को घटने तो लगा, लेकिन सुविखा बाबू और धरमपुर एहतमाली के लोगों के लिए तटबंध तक आने के लिए अभी नाव ही एकमात्र सहारा है। यहां प्रशासन की ओर से लोगों को तटबंध तक लाने और ले जाने के लिए तीन नावें लगाई गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल ढाई से तीन महीने तक नाव की उनके आवागमन का एकमात्र सहारा होती है।
जलस्तर घटने से मैरुंड गांव सुविखा बाबू में अभी कोई राहत नहीं होगी। गांव के रामनाथ कहते हैं कि अब महीनों नाव से ही दिनचर्या होगी। पशुओं के लिए चारा लाने से लेकर गृहस्थी तक का सामान नाव से ही आएगा। गांव के स्वामी नाथ कहते हैं कि गांव तीन महीने तक टापू बना रहता है। खेती-किसानी सब नाव के सहारे होती है।
माता प्रसाद, विशाल, श्याम लाल ने बताया कि बाढ़ आने पर काफी परेशानी होती है। तीन महीने काफी समस्या होती है। प्रशासन की तरफ से तीन नाव लगाई गई है। वहीं, बिशुनदासपुर की अनुसूचित बस्ती, खजांची पुरवा, टेढ़वा आंशिक के सिवान की तरफ नदी का पानी धीरे-धीरे पानी फैल रहा है। इससे माझा क्षेत्र में पशु चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। कटरिया चांदपुर के बैठे ठोकर नंबर एक पर लगातार बाढ़खंड परकोपाइन, ईंट के रोड़े और बोल्डर से ठोकर को मजबूत करने में जुटा हुआ है।
कटरिया चांदपुर तटबंध पर खजांचीपुरवा से लेकर चांदपुर गांव तक तटबंध पर पानी का दबाव बना हुआ है। हालांकि स्थिति नियंत्रण में है। गौरा सैफाबाद तटबंध पर टकटकवा से लेकर दलपतपुर तक तटबंध पर दबाव बना हुआ है। टकटकवा गांव के रिंगबाध पर पानी का तेज दबाव बना हुआ है। कटरिया चांदपुर तटबंध के एसडीओ जितेंद्र कुमार का कहना है की जलस्तर घट रहा है। तटबंध पर कोई खतरा नहीं है। हरतरह के खतरे से निपटने की तैयारी की गई है।