संवाद न्यूज एजेंसी
बनकटी। किसी ने सही कहा है कि अगर हौसले बुलंद हों और इरादे पक्के तो सफलता कदम चूमती है। इसमें उम्र कोई मायने नहीं रखता। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है क्षेत्र के करीब दर्जन भर साइकिल सवार बुजुर्गों ने। उन्होंने साइकिल से प्रयागराज पहुंच कर महाकुंभ संगम में स्नान किया और आठ दिन बाद वापस घर लौटे।
जत्थे में शामिल बुजुर्ग ललित और लालमन समेत अन्य ने कहा कि साइकिल चलाते-चलाते उन लोगों के पांवों में छाले पड़ गए हैं...फिर भी हिम्मत नहीं हारी। संगम में डुबकी लगाने के बाद ही घर लौटे। उन्होंने कहा कि गंगा मैया पर पूरा भरोसा है कि उनकी कृपा से सबकुछ ठीक हो जाएगा।
क्षेत्र के करीब दर्जनभर वरिष्ठ नागरिकों ने संगम तट पर आयोजित महाकुंभ में साइकिल से जाने का फैसला लिया और 26 जनवरी को प्रयागराज के लिए रवाना हो गए। प्रयागराज स्थित झूसी तक करीब ढाई सौ किमी का सफर पूरा करने में उन्हें 48 घंटे लग गए। 28 जनवरी की रात में विश्राम किया और दूसरे दिन संगम में डुबकी लगाकर 30 जनवरी को वापस अयोध्या धाम के लिए निकल पड़े।
दो फरवरी को अयोध्या धाम पहुंच कर सरयू स्नान किया और सोमवार की शाम को उनका जत्था बनकटी पहुंच गया। जत्था में शामिल 75 वर्षीय सत्यनारायण ने बताया कि पहले भी वह माघ मेला में प्रयागराज साइकिल से जाते रहे हैं।
65 वर्षीय मुनिरका और 76 वर्षीय मातादीन ने बताया कि गंगा, यमुना व अदृश्य सरस्वती के संगम तट से पुरानी भक्ति है। हम लोग हर साल अपनी टीम लेकर प्रयागराज स्नान करने जाते हैं। 65 वर्षीय कोमल ने बताया कि मैं आज भी घर पर जब पूजा करता हूं तो जल लेकर गंगा मैया की आराधना करता हूं।
60 वर्षीय गंगाराम ने बताया कि अब तो हम लोगों ने यह ठान लिया है कि जब तक शरीर साथ देगा, तब तक संगम स्नान करने जरूर जाएंगे।