किसान समस्या से जुड़ी छह सूत्रीय मांगों को लेकर भाकियू कार्यकर्ताओं का धरना चौथे दिन भी जारी रहा। तहसीलदार नवीन कुमार से वार्ता में समस्याओं के निराकरण के लिए आश्वासन दिए जाने पर भी कार्यकर्ता अड़े रहे और प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया।
एसडीएम कार्यालय परिसर में भाकियू कार्यकर्ताओं ने आगे की रणनीति बनाई। इस दौरान हुई पंचायत में तहसील अध्यक्ष हरी प्रसाद चौधरी ने कहा कि छह माह से किसान पंचायत में तहसील के अधिकारियों से छह सूत्रीय मांगों के निस्तारण की मांग भाकियू कर रहा है मगर अधिकारी आश्वासनों की घुट्टी पिला रहे हैं। अब आर-पार की लड़ाई होगी। कहा कि प्रशासन के हठवादी रवैये को लेकर भाकियू अगली रणनीति पर अमल शुरू करेगा। जयपालपुर की प्रेमा देवी, लौहरौली में पट्टे की जमीन पर आवंटी को कब्जा दिलाने, सेमरा गांव के कोटे की दुकान का लाइसेंस निरस्त करने आदि मांगों को लेकर पदाधिकारियों ने शासन और प्रशासन को किसान विरोधी बताते हुए आलोचना की। इस मौके पर सीताराम, सत्य नरायन, राम बहादुर, राम सेवक, राम सहाय, दुर्गा प्रसाद सहित अन्य मौजूद रहे।
तहसील प्रशासन हरकत में आया
भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं के धरने की आक्रामक रुख भांपते हुए सोमवार को स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। धरने में मौजूद लोहरौली गांव के हृदयराम की पट्टे की जमीन पर कब्जा दिलाने के लिए तहसीलदार मौके पर गए। आवंटी हृदयराम की पत्नी को तहसीलदार ने चपरासी से बुलवाया और साथ लेकर गांव में जमीन का जायजा लिया।
रोजगार सेवकों ने लगाया ताला
रुधौली।
पांच महीने से बकाया मानदेय का भुगतान नहीं मिलने से ग्राम रोजगार सेवकों में गुस्सा है। सोमवार को एकजुट रोजगार सेवकों ने नारेबाजी करते हुए बीडीओ कार्यालय गेट पर तालाबंद कर प्रदर्शन और नारेबाजी की।
दिन में 11 बजे ग्राम रोजगार संघ के ब्लॉक अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद चौधरी की अगुवाई में अनिल कुमार, चंद्रशेखर चौधरी, प्रमोद कुमार, राम सुदेश, अजय प्रताप चौधरी, गोपाल सिंह, गायत्री देवी, श्याम सुंदर, धर्मेंद्र कुमार, संजय कुमार, रमेश कुमार चौधरी, अशोक चौधरी, दिनेश कुमार, साधना मिश्रा, मनोज कुमार चौधरी नारेबाजी करते ब्लॉक कार्यालय परिसर पहुंचे। कार्यालय में कार्य कर रहे लोगों को बाहर कर वहां पर ताला बंद कर दिया। मौजूद सभी कर्मचारी कार्यालय से बाहर पेड़ के नीचे बैठे रहे। रोजगार सेवकों ने बताया कि 13 अक्टूबर को ही चेताया था कि 16 अक्टूबर तक बकाया मानदेय का भुगतान नहीं मिलने पर तालाबंदी और प्रदर्शन किया जाएगा। फिर भी जिम्मेदार नहीं चेते। मजबूर होकर हम लोगों को प्रदर्शन करना पड़ रहा है। बार-बार अनुरोध का जिम्मेदारों पर कोई फर्क नहीं जबकि त्योहार सिर पर है।