संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश प्रमोद कुमार गिरि ने हत्या के पांच साल पुराने मामले में संदेह का लाभ देकर चार आरोपियों को बरी कर दिया। परिस्थिति जन्य साक्ष्य पर आधारित मामले में अभियोजन पक्ष साक्ष्य की कड़ियां जोड़ने में असफल रहा है।
अभियोजन के अनुसार, रुधौली थाना क्षेत्र के सिहारी खुर्द गांव निवासी रामचंद्र ने 14 अगस्त 2019 को थाना में केस दर्ज कराते हुए कहा कि वह भतीजे अनिल कुमार के साथ गांव के बाहर ट्यूबवेल पर सो रहा था।
तीन अगस्त की सुबह करीब 4:30 अनिल कुमार नित्यक्रिया के लिए गन्ने के खेत में गया था। काफी देर तक वापस नहीं आया तो उसकी खोजबीन की। दूसरे दिन गांव वालों के साथ गन्ने के खेत में ढूंढते समय अनिल का नेकर मिला जिसमें खून लगा हुआ था।
सिहारी सरदहा के लोगों ने बताया कि गांव के तालाब में एक लाश उतरायी है। जाकर देखने पर पता चला कि बिना वस्त्र के तालाब में तैर रही लाश अनिल की है पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने लाश को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया।
डॉक्टर के अनुसार, शरीर पर आई चोटों के कारण युवक की मौत हो गई थी। उसके शरीर पर धारदार हथियार के कई घाव पाए गए थे। रामचंद्र की शिकायत पर गांव के राम पलटन व राम नरेश पर केस दर्ज हुआ।
विवेचना के बाद राम पलटन, रामनरेश, अशोक व विजय के विरुद्ध आरोपपत्र अदालत में दाखिल हुआ। अभियोजन की तरफ से आठ गवाह प्रस्तुत किए गए। बचाव पक्ष की तरफ से अधिवक्ता रामशरण चौबे ,शरद चतुर्वेदी ने कहा कि घटना क्यों और किसके द्वारा की गई, इसे अभियोजन पक्ष साबित नहीं कर पाया है। गवाहों के बयानों में घोर विरोधाभास है। दोनों पक्ष की दलील सुनने के बाद अदालत ने संदेह का लाभ देकर आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया।ी