इस साल 90 नमूने हुए फेल, 17 उत्पाद तो एकदम असुरक्षित, 56 अधोमानक
व्रत में उपयोग होने वाली खाद्य सामग्रियों में भी मिलावट, जिंदगी से खिलवाड़
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। आप भी सजग हो जाइए। मिठाई, खोवा, दाल, तेल, पनीर जैसे खाद्य पदार्थ भी सुरक्षित नहीं है। यदि आप शुद्धता के फेर में फंसकर शहर के प्रसिद्ध दुकान से महंगे दर पर मिठाई का डिब्बा ला रहे हैं तो यह भी सेहत के लिए फायदेमंद नहीं है। यकीन मानिए, मिलावट यहां भी है। इन खाद्य पदार्थों के सेवन से सेहत को खतरा है। लीवर, किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियां पनपने में असुरक्षित खाद्य पदार्थ भी कारक बन रहे हैं।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से इस साल जनवरी से अब तक प्रयोगशाला में भेजे गए नमूनों में 139 की रिपोर्ट आई है। विभिन्न तरह के प्रतिष्ठानों से लिए गए खाद्य पदार्थों के कुल 99 नमूने फेल बताए गए हैं। इसमें 56 नमूने की रिपोर्ट अधोमानक पाई गई है। इसमें सिर्फ इस तरह की मिलावट पाई गई है, जिसके सेवन से सेहत को खतरा नहीं रहता है।
17 नमूने बिल्कुल असुरक्षित मिले हैं। इनके सेवन से सेहत को खतरा है। 26 नमूने मिथ्या छाप पाए गए हैं। असुरक्षित पाए गए नमूने में कच्चे-पक्के हर तरह के सामग्री शामिल हैं। शहर के सबसे चर्चित मिष्ठान भंडार से लेकर अनाज एवं रेडीमेड खाद्य पदार्थों के दुकानों के भी उत्पाद अधोमानक या असुरक्षित पाए गए हैं।
त्योहार पर उपवास रहने वाले लोग भी असुरक्षित एवं मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेवन अनजाने में खूब कर रहे हैं। बाजार में बिकने वाले साबूदाना, तिन्नी का चावल, किसमिस, काली मिर्च तक अधोमानक पाया गया है। व्रत में सेवन किया जाने वाला साबूदाना का पापड़ का नमूना तो असुरक्षित मिला है। इसमें रंग मिला हुआ पाया गया है। इसके सेवन से सेहत को खतरा है। एक गल्ला व्यापारी के यहां बिकने वाले चावल का नमूना भी असुरक्षित मिला है। रिपोर्ट के अनुसार चावल में कीड़े पाए गए हैं। यह भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया गया है।
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शहर के तीन फेमस दुकानों की मिठाई मिली असुरक्षित
शहर में मिठाई की तीन फेमस दुकानों की मिठाई, खोवा आदि असुरक्षित पाई गई हैं। इन दुकानों से अधिकतर वीआईपी एवं अधिकारियों के घर तक मिठाई पहुंचती है। गांधीनगर क्षेत्र की तीन दुकानों के नमूने असुरक्षित पाए गए हैं। एक दुकानदार की सोन पापड़ी, दूसरे दुकान का लड्डू और तीसरे दुकान से खोवा का नमूना लेकर प्रयोगशाला भेजा गया था। यह नमूने असुरक्षित मिले हैं। इन उत्पादों में रंग मिला हुआ पाया गया है। हालिया रिपोर्ट में मटर की दाल, पनीर, मस्टर्ड ऑयल, पेड़ा, तिल का तेल समेत खाद्य पदार्थ मिलावटी या कलर युक्त पाए जा रहे हैं। अमूमन बाजार के इन्हीं खाद्य पदार्थों का सेवन अधिकांश घरों में किया जा रहा है। जिससे लोग बीमारियों की चपेट में भी आ रहे हैं।
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असुरक्षित नमूनों के 15 प्रकरण एसीजेएम कोर्ट में दर्ज
इस साल असुरक्षित नमूनों के 15 प्रकरण एसीजेएम कोर्ट में दर्ज कराए जा चुके हैं। इसमें संबंधित दुकानदार को अपना पक्ष न्यायालय में रखना होगा। इन मामलों में जुर्माने के साथ दंड का भी प्रावधान है। इसके अतिरिक्त 65 अधोमानक नमूनों का प्रकरण एडीएम कोर्ट में दाखिल किए गए हैं। इन मामलों में जुर्माने का प्रावधान है। जबकि 26 मिथ्या छाप उत्पाद के मामलों को निस्तारण विभागीय स्तर पर जुर्माना वसूलकर किया जा रहा है।
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मिलावट करने वालों पर शिकंजा नहीं
खाद्य सामग्रियों में मिलावट खोरी करने वालों पर विभाग शिकंजा कस नहीं पा रहा है। जिनके खुद के उत्पाद मिठाई, खोवा, पनीर आदि मिलावटी एवं असुरक्षित पाए जा रहे हैं उन्हें तो केस का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन आटा, दाल, चावल, तेल जैसे उत्पाद में मिलावट करने वाले बड़े धंधेबाज पकड़ से दूर हैं। इन मामलों में छोटे दुकानदार फंस रहे हैं। जबकि इन खाद्य पदार्थों का निर्माण कहीं और हो रहा है। वहां तक सुरागरसी कर विभाग नहीं पहुंच पा रहा है।
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कोट
सभी तरह के खाद्य पदार्थों के नमूने लिए जाते हैं। नमूने फेल होने पर या असुरक्षित होने पर कार्रवाई की जाती है। जागरूकता के उद्देश्य से विभाग एक विशेष वैन भी बाजार में उतारा है, जिसमें कोई भी दुकानदार या व्यक्ति खानपान से जुड़े सामग्री की तुरंत जांच करा सकता है।
-धर्मराज मिश्र, अभिहित अधिकारी
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आजकल खाद्य पदार्थों के निर्माण में कलर का उपयोग हो रहा है। मिठाई, सब्जी, खोवा आदि को नैचुरल दिखाने के लिए रंगों का इस्तेमाल हो रहा है। रंग एक तरह के रसायन हैं। इनके सेवन से सेहत को खतरा रहता है। असुरक्षित खाद्य पदार्थ से लीवर, किडनी पर असर पड़ता है।
-डॉ. रामजी सोनी, फिजिशियन, जिला अस्पताल