बस्ती-गोरखपुर और बस्ती-लुंबिनी हाईवे के बीच एक किमी से भी कम है दूरी, दोनों मार्ग पर ग्रीन बेल्ट
हरदिया से मनौरी और बड़ेवन से परसा के बीच सड़क के मध्य से 67.5 मीटर के दायरे में निर्माण प्रतिबंधित
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। लखनऊ-गोरखपुर और लुंबिनी-दुद्धी मार्ग पर बस्ती परिक्षेत्र में बीडीए ने ग्रीन बेल्ट घोषित कर रखा है। जबकि बड़ेवन से मनौरी के बीच इन दोनों हाईवे के बीच एक किमी से कम की दूरी है। शहर का विस्तार भी इसी क्षेत्र में हो रहा है। ऐसे में दोनों मार्गों पर ग्रीन बेल्ट घोषित होने से काश्तकारों की उलझने बढ़ गई हैं। मुख्य मार्ग के किनारे निर्माण प्रतिबंधित होने से स्थानीय काश्तकार बीडीए के इस एक्ट का विरोध करना शुरू कर दिए हैं।
महायोजना-2031 में हाईवे के किनारे ग्रीन बेल्ट का दायरा घटा दिया गया है। महायोजना 2031 में हाईवे के मध्य से 87.5 मीटर के दायरे में दोनों तरफ ग्रीन बेल्ट निर्धारित था। इस हिस्से में निर्माण प्रतिबंधित किया गया था। नई महायोजना में 20 मीटर दायरा घट गया है। अब 67.5 मीटर के दायरे में हाईवे के दोनों तरफ ग्रीन बेल्ट होने के कारण निर्माण नहीं किया जा सकता है। यह नियम बड़ेवन से लुंबिनी-दुद्धी मार्ग पर भी लागू हैं। दोनों हाईवे बड़ेवन से मनौरी तक अगल-अगल है। इनके बीच की दूरी एक किमी से भी कम हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में काश्तकार प्रभावित है। काश्तकारों का कहना है कि लखनऊ-गोरखपुर फोरलेन हाईवे है। जबकि लुंबिनी-दुद्धी टू-लेन सड़क है। दोनों सड़क पर ग्रीन बेल्ट घोषित करने से काश्तकार ठगे हुए महसूस कर रहे हैं। वह अपनी जमीनों में निर्माण नहीं कर पा रहे हैं।
शहर का दायरा नगर पालिका क्षेत्र से बाहर निकलकर बरगदवा, हरदिया, मनौरी तक बढ़ रहा है। मगर, हरदिया से मनौरी तक लुंबिनी-दुद्धी मार्ग पर ग्रीन बेल्ट घोषित है। अब यहां सड़क के किनारे काश्तकार अपनी जमीनों में निर्माण नहीं कर सकते हैं। बीडीए ग्रीन बेल्ट के दायरे में आने वाली जमीनों का मानचित्र स्वीकृति नहीं करेगा। ऐसे में इस दायरे में आवासीय एवं कामर्शियल दोनों तरह के निर्माण प्रतिबंधित है।
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नागरिकों ने बैठक कर जताया विरोध
हरदिया चौराहे पर नागरिकों की शनिवार को इस मुद्दे को लेकर बैठक हुई। राजू पाल, प्रवीण कुमार,, हरिआम, सूर्यनाथ आदि काश्तकारों का कहना था कि उनका गांव हरदिया, बसिया, बनकटा, उसका नगर पालिका के विस्तारीकरण में शामिल है। उन्हें उम्मीद थी कि उनका क्षेत्र शहरी क्षेत्र में शामिल होने से अपनी जमीनों का सदुपयोग करेंगे और रोजगार के तमाम अवसर मिलेंगे। मगर, बीडीए पे ग्रामीणों की इस मंशा पर पानी फेर दिया है। यहां ग्रीन बेल्ट का कोई औचित्य नहीं है। नागरिकों ने मांग उठाई कि जनहित में हरदिया से मनौरी के बीच ग्रीन बेल्ट की बाध्यता समाप्त की जाए, ताकि हम लोग अपनी जमीनों का कामर्शियल एवं आवासीय उपयोग कर सकें। इस मौके पर प्रदीप राजभर, सतीश, अजीत कुमार, कांशीराम, त्रिलोकी निषाद, दौलत राम, रवि दुबे, रंगनाथ आदि मौजूद रहे।
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हमारी सड़क के किनारे पुश्तैनी जमीन हैं। इधर विकास की हलचल बढ़ी। टू-लेन सड़क बनी और शहर का विस्तार होने लगा तो हमारी जमीनें ही हमारे जीवन स्तर को सुधारने में उपयोगी दिखने लगी। मगर, बीडीए ने बिना सहमति के हमारी जमीनों को ग्रीन बेल्ट में शामिल कर लिया है।
-अनिल कुमार मिश्र, बसिया
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हम अपनी जमीनों का उपभाेग कई पीढि़यों से कर रहे हैं। पहले विकास की रफ्तार नहीं थी तो खेती-बारी करते रहे। इधर अच्छी सड़क हो गई, पेट्रोल पंप एवं बाजार विकसित होने लगे तो हम लोग भी अपनी जमीन में दुकान आदि बनाकर अपनी आय बढ़ाना चाहते हैं। मगर, बीडीए हमारी मंशा पर पानी फेर रहा है। हमारी जमीनों से निर्माण का प्रतिबंध हटना चाहिए।
-हरीराम, बसिया
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कोट
ग्रीन बेल्ट से जिन नागरिकों को समस्या है वह कारण सहित लिखित रूप से आपत्ति दर्ज कराएं। उसकी जांच-पड़ताल कराने के साथ बीडीए उनकी आपत्ति को शासन स्तर पर प्रेषित करेगा। स्थानीय स्तर पर इसमें कोई परिवर्तन नहीं हो सकता है।
-प्रतिपाल सिंह चौहान, सचिव, बीडीए/एडीएम