बस्ती। नजूल की जमीनों को हथियाने का खेल अब बंद होगा। इसमें प्रशासन के अलावा बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए) का भी सीधा दखल होगा। प्राधिकरण के 151 वर्ग किमी के दायरे में आने वाली सभी नजूल की भूमि को चिह्नित कर लिया गया है। इन जमीनों को अतिक्रमण से बचाने के लिए बीडीए ने अपना बोर्ड भी लगवा दिया है, ताकि वहां किसी का अवैध कब्जा न हो सके। इस पर प्रशासनिक सहमति बन चुकी है।
नगर पालिका एवं आसपास के क्षेत्र की कीमती नजूल की जमीनों पर भू-माफिया की नजर रहती है। वह पहले कब्जा करते हैं और बाद में तहसील में गहरी पैठ बनाकर राजस्व अभिलेख में नाम दर्ज करा लेते हैं। शिकायत के आधार पर कभी-कभी इस खेल का भंडाफोड़ भी होता है। प्रशासन ने इसका स्थायी निदान निकालना शुरू कर दिया है। इन जमीनों के संरक्षण के लिए बीडीए की अहम भूमिका तय की गई है। महायोजना-2031 के मास्टर प्लान तैयार करने के दौरान नजूल की जमीनों का चिह्नांकन कराया गया है। क्षेत्रवार राजस्व अभिलेख से मिलान कर इसका विवरण भी मास्टर प्लान में दर्ज किया गया है।
महायोजना को स्वीकृति मिलने के बाद संपूर्ण नजूल की जमीनों का उल्लेख मास्टर प्लान में मिलेगा, ताकि इन जमीनों पर नक्शा पास कराने के दौरान बीडीए को कोई झांसा न दे सके। मास्टर प्लान से गाटा संख्या के जरिये जमीन की प्रकृति का पता आसानी से लग जाएगा। इसके अलावा नजूल की खाली पड़ी जमीनों पर बीडीए अपना बोर्ड भी लगाएगा। जिस पर गाटा संख्या और रकबा का ब्योरा लिखा होगा। इससे लोग देखते ही नजूल की जमीन की पहचान कर सकें।
अवैध निर्माण भी ढहाए जाएंगे
नजूल की जमीनों के चिह्नांकन के बाद स्थिति स्पष्ट हो गई है। इन जमीन की मौजूदा प्रकृति का विवरण भी संकलित किया गया है। जहां अवैध रूप से इन जमीनों को कब्जा कर लिया गया है वहां बुलडोजर चलाने की तैयारी है। नगर पालिका क्षेत्र में नजूल की जमीनों को खाली कराने का जिम्मा नगर पालिका और तहसील प्रशासन का होगा। इसके अलावा प्राधिकरण क्षेत्र के गांवों में नजूल की जमीनों को बीडीए खुद अतिक्रमण मुक्त कराएगा। यह कार्रवाई यदि शुरू हुई तो कई भू-माफिया के चेहरे बेनकाब हो जाएंगे।
नजूल एवं सार्वजनिक उपयोग की जमीन ग्रीन जोन
नजूल एवं सार्वजनिक उपयोग की जमीनों को बीडीए ने ग्रीन जोन के रूप में चिह्नित किया है। यहां किसी तरह का आवासीय एवं कामर्शियल निर्माण निषेध है। इन जमीनों को पार्क, हरियाली के रूप में विकसित किया जाएगा। सार्वजनिक उपयोग की जमीनों में तालाब, पोखरे, गड़ही, चारागाह, भीटा, नदी के किनारे की जमीन पर निर्माण के लिए नक्शा नहीं पास होगा। इस प्रकृति की जमीनों को खाली रखा जाएगा।
क्या है नजूल की जमीन
जिन क्रांतिकारी, विद्रोही या स्वतंत्रता सेनानी अंग्रेजों की दमनकारी नीति के चलते पलायित हुए उनकी जमीनों को ब्रिटिश हुकूमत में अपने कब्जे में ले लिया। देश आजाद होने के बाद ऐसी जमीनों को नजूल की जमीन घोषित की गई। जिन पर वास्तविक मालिकाना हक वाले सामने आए, उन्हें यह वापस मिला और जिन पर किसी की दावा नहीं हुआ, उस पर सरकार का अधिकार होता है। इन जमीनों पर सरकार का संपूर्ण रूप से मालिकाना हक नहीं होता है। सदर तहसील के पास नजूल की जमीन का ब्योरा नहीं है। सिर्फ राजस्व अभिलेख में ही यह जमीनें दर्ज हैं। मगर समूचे तहसील क्षेत्र में नजूल की जमीनों की संख्या और रकबा का संकलन नहीं हैं। कोई भी जिम्मेदार अधिकारी नजूल की जमीनों का विवरण नहीं दे पा रहे हैं।