वहां पढ़ाई के दौरान अमेरिका की एक निजी कंपनी ने मंगल ग्रह अभियान के लिए यूटा के रेगिस्तान में प्रशिक्षण के लिए प्रस्ताव दिया। यहां भारत से अनुश्री के अलावा सात देशों के प्रशिक्षणार्थियों के साथ मंगल ग्रह के वातावरण में रहने का प्रशिक्षण दिया गया। अनुश्री बताती हैं कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें हैब से बाहर आने पर पंद्रह किलो का स्पेस सूट पहनकर काम कराया जाता था।
दो माह नार्थ पोल यानी उत्तरी ध्रुव के करीब प्रशिक्षण दिया गया, जहां दो माह में कभी रात नहीं देखी। इंग्लैंड में मंगल ग्रह से संबंधित वैज्ञानिक प्रयोग के लिए धरती के 1.1 किमी नीचे नमक की खदान में पंद्रह दिन का प्रशिक्षण मिला।
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अनुश्री ने कहा कि उनका जीवन अब मंगल ग्रह पर जीवन की खोज के लिए समर्पित है। कहती हैं कि मिशन अंतरिक्ष का सफर अभी लंबा है। फिर भी मंगल ग्रह के अभियान की पहला पायदान अब मिल गया है। इसी के सहारे मंगल ग्रह तक पहुंचने का सपना साकार होगा।
बस्ती जिले की बेटी गीतिका श्रीवास्तव को इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग की कमान इसी वर्ष दी गई है। गीतिका के पिता जीपी श्रीवास्तव और मां डॉ. गीता श्रीवास्तव बतातीं हैं कि बेटी को देश सेवा करते देखने से बड़े गर्व की बात और क्या हो सकती है।
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उन्हें करीब चार दिन पूर्व बेटी को पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग की प्रभारी बनने की जानकारी मिली थी। शहर के जेल रोड स्थित राजपूत कॉलोनी निवासी जीपी श्रीवास्तव रिटायर्ड बैंक अधिकारी हैं। वह मूलरूप से लालगंज थानाक्षेत्र के कैतहा गांव के रहने वाले हैं। उनकी बेटी गीतिका श्रीवास्तव 2005 बैच की आईएफएस (भारतीय विदेश सेवा) अफसर हैं।