पहला उनके कर्मचारी किसान बनकर आम महोत्सव में बिना उनकी जानकारी कैसे पहुंचें । कर्मियों के पुरस्कार प्राप्त करने के बाद इस मामले में उनके स्तर से क्या कार्रवाई की गई। इस बीच यह प्रकरण मुख्यमंत्री के संज्ञान में आ गया। मंडलायुक्त और डीएम बस्ती से इसकी रिपोर्ट मांगी गई।
आयुक्त की भेजी गई रिपोर्ट पर शासन स्तर से कार्रवाई शुरू हुई। माली की सेवा से बर्खास्तगी संयुक्त निदेशक ने जबकि चालक के निलंबन की कार्रवाई निदेशक स्तर से की गई है। तीसरे आरोपित उद्यान विशेषज्ञ शुभम सिंह के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी गई थी।
14 से 16 जुलाई तक लखनऊ में आयोजित आम महोत्सव में हिस्सा लेने के लिए बस्ती के तीन प्रगतिशील किसानों ने अनिल पांडेय,पुष्करादित्य सिंह,बृजेंद्र प्रताप नरायन पांडेय ने पंजीकरण कराया था। कांवड़ यात्रा के चलते यह किसान महोत्सव में प्रतिभाग नहीं कर पाए लेकिन इनके बाग की आम की प्रजातियां लेकर संयुक्त निदेशक कार्यालय की टीम गई थी। बस्ती के इन तीनों किसानों के स्टाल पर उद्यान विभाग के ही कर्मी लगाये गए थे।
किसान अनिल पांडेय के स्टाल से आम बदलने के आरोप के बाद मामला चर्चा में आया। पहले तो किसानों को मैनेज कर इस प्रकरण को दबाने की कोशिश की गई लेकिन बस्ती के ही बृहस्पति पांडेय ने आईजीआरएस पर ऑनलाइन शिकायत कर दी। जांच एवं कार्रवाई की नौबत आई तो उन कर्मियों ने गलती स्वीकार करते हुए किसान बन हथियाए गए वो सात पुरस्कार लौटा दिए। अगले दिन संयुक्त निदेशक ने आरोपित कर्मियों को चेतावनी देते हुए पुरस्कार को ससम्मान निदेशक को लौटा दिया था।