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Basti News: मेहनत की कमाई से कराया बैनामा, नाम चढ़वाने के लिए बहा रहे पसीना

Thu, 24 Jul 2025 12:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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बस्ती। जमीन बैनामा लेने के बाद नामांतरण कराना कठिन चुनौती बन गई है। आपत्ति पड़ते ही खारिज दाखिल लटक जा रही। यदि तहसील में नियमित पैरवी के साथ विभागीय लोगों को खुश करने में कोई कसर छूटी तो मामला उलझ सकता है। जिले में 2070 मामले लंबित हैं।
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तहसीलों में लंबित मामले और अधिवक्ताओं की दलीलें इसको पुख्ता कर रही है। जिले की चार तहसीलों में खारिज दाखिल के दो हजार से अधिक मामले लंबित है।
सरकारी रिकाॅर्ड के अनुसार सदर तहसील में नामांतरण से संबंधित 580 मामले लटके हुए है। हर्रैया में 720, रुधौली में 370 और भानपुर में 400 से अधिक मामले लंबे समय से विचाराधीन है। इसमें बैनामा, वसीयत और वरासत के आधार पर खारिज दाखिल का प्रकरण शामिल है। अधिकांश मामले साल दर साल पुराने हो चुके हैं। आपत्तियों का निस्तारण नहीं होने से दाखिल खारिज लटका हुआ है। जिससे जमीन की प्रकृति विवादित बनी हुई है।
सदर तहसील के जिगिना के रहने वाले राजेश कुमार ने बताया कि छह माह पहले उन्होंने एक जमीन का बैनामा कराया। 45 दिन बीतने के बाद भी खारिज दाखिल नहीं हुआ। अधिवक्ता के माध्यम से पैरवी की। विभागीय लोगों को खुश करना पड़ा।
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तब जाकर अमल दरामद हो पाया। इसमें तीन महीने लग गए। अधिवक्ताओं को भी दाखिल खारिज, वरासत और वसीयत के लंबित मामलों को लेकर मलाल है। उनका कहना है कि यदि बैनामा शुदा जमीन में किसी ने आपत्ति लगा दी तो खारिज दाखिल लटक जा रही है। सुनवाई के नाम पर लंबा समय लिया जा रहा है। निस्तारण में कई साल लग जा रहे हैं। सुनवाई के दौरान सभी तथ्य देने के बाद भी आदेश में विलंब किया जा रहा है।
अधिवक्ता विजयकांत सिंह कहते हैं कि सामान्य तौर पर 45 दिन के भीतर दाखिल-खारिज हो जाना चाहिए। लेकिन, गैर विवादित मामलों में भी इसका पालन नहीं किया जा रहा है।
बैनामा के बाद दाखिल खारिज होने में दो से तीन महीने लग जा रहे हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री इस मामले को लेकर गंभीर हुए हैं। उन्होंने 45 दिन के भीतर खारिज दाखिल अनिवार्य किया है और विवादित मामलों में निस्तारण के लिए 90 दिन का समय दिया है।
यदि इसके बाद भी दाखिल खारिज नहीं हुआ तो डीएम और कमिश्नर को जवाबदेह बनाया गया है।मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद इन मामलों के निपटारे में कुछ तेजी आने की संभावना है। लेकिन, जब उच्चाधिकारी नियमित इन मामलों की समीक्षा करेंगे तभी अच्छा परिणाम आ सकता है।
वहीं अधिवक्ता मिथिलेश श्रीवास्तव कहते हैं कि पिछले साल शासन के निर्देश पर राजस्व मामलों का निपटारा तेजी से कराया गया था। जिले में 20 हजार से अधिक राजस्व से जुड़े मामले निस्तारित किए गए थे। इसमें दाखिल खारिज, वरासत और वसीयत के ज्यादातर मामले शामिल रहे।
अधिकांश मामले सिर्फ फाइलों में ही निस्तारित हुए। तमाम मामलों में राजस्व मजिस्ट्रेट के स्पष्ट आदेश के बाद भी अनुपालन नहीं हो पाया है। फरियादी अभी भी आदेश लिए भटक रहे हैं। सरकारी रिकार्ड में उनका वाद निस्तारित दर्ज हो चुका है।
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