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बस्ती-कांटे का मुख्य मार्ग गड्ढों में गायब

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बस्ती-कांटे मार्ग बदहाल। - फोटो : amar ujala
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बस्ती। शहर को मुंडेरवा और कांटे से लोक निर्माण विभाग की बस्ती-कांटे सड़क जोड़ती है। इस मार्ग पर जहां औद्योगिक क्षेत्र प्लास्टिक कांप्लेक्स है, वहीं, कई नामचीन स्कूूलों तक इस मार्ग से आवागमन होता है। इस मार्ग के मनहनडीह गांव के पास सड़क पर तीन ऐसे गड्ढे बन गए हैं, जहां बच्चों को ऑटो व अन्य वाहन वाले रिस्क लेकर स्कूल पहुंचाते हैं। क्योंकि जरा सी चूक हुई तो तय मानिए बड़े हादसे से कोई बचा नहीं पाएगा। हालांकि, इस मार्ग को बनाने की भी कवायद कई बार हुई, मगर चंद रोज में फिर इसकी हालत पुरानी जैसी हो जाती है।  
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जिला और टीबी अस्पताल के आगे बढ़ें तो मनहनडीह गांव सड़क पर ही है। इस स्थल पर पहुंचने के बाद वाहन चालकों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। क्योंकि यहां सड़क पर ही तीन बड़े गड्ढे उनका स्वागत करते हैं। घुटनों तक यहां पानी भरा ही है। इसकी गिट्टियां व बड़े बोल्डर इधर-उधर बिखर कर दुर्घटना का संकेत देती हैं। हालांकि, इस मार्ग से आने-जाने वाले किनारे कीचड़ व मिट्टी से जैसे-तैसे इसको पार कर जाते हैं, मगर कई बार लोग फिसल कर इसमें गिर भी जाते हैं। इस संबंध में पीडब्लूडी निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता डीएन यादव कहते हैं कि विभाग ने जर्जर मार्गों की सूची बनाई है। निश्चित तौर पर यह मार्ग भी उसमें होगा। इसकी तकनीकी जांच कराकर बरसात बाद इसे दुरुस्त करा दिया जाएगा। 

इसी मार्ग पर स्थित मंझरिया गांव के रामतीरथ यादव कहते हैं कि यह सड़क लंबे समय से खतरनाक बनी हुई है। इसे कई बार ठीक भी कराया गया, मगर चंद रोज में फिर इसकी स्थिति पुरानी जैसी ही हो जाती है। रात को इस रास्ते गुजरने में डर लगता है।  
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रोडवेज के निकट रहने वाले पंकज श्रीवास्तव कहते हैं कि वे प्लास्टिक कांप्लेक्स स्थित एक एजेंसी में नौकरी करते हैं और इसी रास्ते उनका आवागमन होता है, मगर यहां पहुंचते ही उनको दुर्घटना का डर सताने लगता है। चूंकि ड्यूटी रात में समाप्त होती है। 
चिलवनियां निवासी व्यवसायी राजन सिंह कहते हैं कि मनहनडीह के निकट मार्ग की जर्जर स्थिति के चलते वे राह बदलकर आते जाते हैं, मगर कभी-कभार जरूरत होने पर यहां आना मजबूरी बन जाती है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। 
डारीडीहा गांव निवासी सुनील मिश्र कहते हैं कि उनके बच्चे यहां स्थित एक स्कूल में पढ़ते हैं, मगर बच्चों को ऑटो से भेजने में डर लगता है कि कहीं वे किसी दुर्घटना के शिकार न हो जाएं क्योंकि मार्ग के बीचोंबीच जो गड्ढा है वह बेहद खतरनाक है।   
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