बस्ती। मंडल मुख्यालय के बस्ती-कांटे मार्ग पर आवागमन यानी कदम-कदम पर जोखिम। दाहिने-बाएं किधर जाएं, खतरा ही खतरा है। सड़क पर कीचड़ है। एक तरफ की पटरी पानी में डूबी है। दूसरी ओर एक फीट ऊंची निर्माणाधीन आरसीसी सड़क से निकली हुई लोहे की सरिया है। इधर, ध्यान भटका तो सरिया से टकराए, उधर ध्यान भटका तो पानी या कीचड़ में जाएं। अपनी मर्जी से आगे बढ़ नहीं सकते। संकरे रास्ते में एक साथ कई वाहनों के आगे बढ़ने की जद्दोजहद है। इस मुसीबत से जान छुड़ाकर निकल भी नहीं सकते, क्योंकि पीछे भी ठसाठस वाहन है।
1200 मीटर आरसीसी निर्माण पूर्ण न होने से 20 किलोमीटर लंबी इस सड़क पर आवागमन बाधित है। शहरी क्षेत्र में इस मार्ग पर अस्पताल चौराहा से औद्योगिक क्षेत्र प्लास्टिक कांप्लेक्स तक लगभग तीन किलोमीटर की लंबाई में जाम लग रहा है। यहां दो जगहों पर आरसीसी निर्माण प्रस्तावित है। काली सड़क बनाए साल बीत गए, लेकिन जिला अस्पताल के तीसरे गेट से टीबी अस्पताल तक और कनपुरवा से प्लास्टिक कांप्लेक्स चौराहे तक 4.52 करोड़ की लागत से बनने वाला आरसीसप्पूरा निर्माण नहीं कराया गया। लेटलतीफी के बाद एक महीने पहले प्रस्तावित दोनों स्थलों पर सात मीटर चौड़ी इस सड़क पर केवल एक तरफ साढ़े तीन मीटर चौड़ाई में आरसीसी निर्माण हुआ, लेकिन वह अभी चालू नहीं है। जिससे सड़क का दूसरा हिस्सा गहरा हो गया है। इधर, बारिश शुरू हुई तो उसमें पानी भर गया है। इससे करीब तीन किलोमीटर तक की यात्रा जान जोखिम में डालने से कमतर नहीं है। यहां पग-पग पर जाम, जलभराव और कीचड़ है। दिनचर्या बहाल होने के बाद पूरे दिन यहां जाम लग रहा है।
सड़क के किनारे घरों के सामने भरा पानी
जिला अस्पताल तीसरे गेट से टीबी अस्पताल तक मनहनडीह क्षेत्र में सड़क के दोनों तरफ सघन आबादी है। बाईं ओर पांच सौ मीटर की लंबाई में साढ़े तीन मीटर चौड़ी आरसीसी सड़क बना दी गई है, लेकिन यह अभी चालू नहीं है। एक तरफ सड़क ऊंची होने से दाहिनी ओर शेष साढ़े तीन मीटर चौड़ी पुरानी सड़क की सतह एक फीट नीची हो गई है। इससे जलभराव का संकट गहरा गया है। सड़क से लेकर लोगों के घरों तक पानी भरा हुआ है। महिलाओं, बच्चों का घरों से निकलना दूभर है। दरवाजे पर पानी भरा है और सामने सड़क पर जाम है। अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से भी डर रहे हैं।
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कनपुरवा में भी लग रहा जाम, भरा है पानी
कमनपुरवा से प्लास्टिक कांप्लेक्स तक लगभग 700 मीटर लंबाई में साढ़े तीन मीटर चौड़ी आरसीसी सड़क बनाई जा रही है। यहां अभी एक तरफ का निर्माण पूरा नहीं हुआ है। लगभग तीन सौ मीटर आरसीसी सड़क बन जाने से शेष साढ़े तीन मीटर चौड़ी सड़क एक फीट नीचे हो गई है। जहां पानी भर गया है। समूचे मार्ग का आवागमन एक लेन पर ही निर्भर हो गया है। आवागमन शुरू होते ही सरकारी बसें, प्राइवेट वाहन, बाइक, आटो, साइकिल एक लेन में फंस जा रहे हैं। कुल मिलाकर तीन किलोमीटर यात्रा तय करने राहगीरों को घंटों लग जा रहे हैं।
स्कूली बच्चों और मरीजों की बढ़ी सांसत
इस मार्ग से आने वाले स्कूली बच्चों और मरीजों की सांसत बढ़ गई है। पहले प्लास्टिक कांप्लेक्स से कनपुरवा की दूरी तय करना और दूसरा टीबी अस्पताल से जिला अस्पताल तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण है। कीचड़, जलभराव के बीच वाहनों के जाम में स्कूली बच्चे और मरीज फंसे रहे हैं। उन्हें कीचड़ में खड़े होकर वाहनों के धुआं के बीच जाम खुलने का इंतजार करना पड़ रहा है।
एक सप्ताह में बन जानी चाहिए एक किमी सड़क
सात मीटर चौड़ी एक किमी आरसीसी सड़क सप्ताह भर में ही बन जानी चाहिए। अब मशीनों का दौर है। सड़क निर्माण में मैन पावर कम लगते हैं। कंकरीट मिक्सर से लेकर ढलाई तक का काम मशीन करती है। सांचा तैयार करने में ही देरी होती है। ढलाई का कार्य तो रात भर में हो सकता है। आरसीसी पकने में कम से कम 15 दिन का और समय चाहिए। -इं. आरआर त्रिपाठी
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नागरिकों ने बताई अपनी पीड़ा
हम अपने बच्चों को सड़क निर्माण होने के नाते साइकिल से स्कूल नहीं भेज पा रहे हैं। प्लास्टिक कांप्लेक्स से शहर में स्थित सरस्वती शिशु मंदिर तक आटो से भेजने में दो बच्चों का प्रतिदिन दो सौ रुपये किराया लग रहा है। यह सड़क साल भर से बन रही है, अभी तक पूरी नहीं हुई। -मंजू चतुर्वेदी, पचौरा।
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हमारा घर सड़क के किनारे स्थित है। दरवाजे पर पानी भर गया है। सामने एक साल से सड़क बन रही है। घर से निकलना दुश्वार हो गया है। कीचड़ और पानी में घुसकर आना जाना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत बच्चों की हो गई है। स्कूल जाते समय कीचड़ लगने से उनका ड्रेस खराब हो रहा है। -रानी शुक्ला, मनहनडीह।
आरसीसी निर्माण होने से एक तरफ सड़क ऊंची हो गई है। दूसरी पटरी नीचे है। बारिश में जलभराव से स्थिति और विकट हो गई है। अब अस्पताल चौराहा से प्लास्टिक कांप्लेक्स तक पहुंचने में घंटों समय लग रहा है। आवागमन के दौरान चोटिल होने का खतरा अलग से रहता है। -उत्तम कुमार, जिगिना
दरअसल, सड़क निर्माण में ठेकेदार मनमानी करते हैं। कार्यदायी एजेंसी के कार्यों की निगरानी नहीं की जाती है। इसलिए निर्माण के दौरान समय का ध्यान नहीं दिया जाता है। एक साल से यह सड़क बन रही है। पैच कार्य पूर्ण होने के छह माह बाद आरसीसी निर्माण शुरू किया गया। बारिश से दिक्कत बढ़ गई है। -इंद्रमणि तिवारी, अस्पताल चौराहा।
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सड़क निर्माण में जहां पानी लगता था उस पर सीसी होनी है। सड़क पूरी हो चुकी है, मगर सीसी के चलते काम अधूरा रह गया है। जल्द ही निर्माण पूरा हो जाएगा। धनाभाव के चलते निर्माण में समय लगा है। -अवधेश कुमार, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड बस्ती