वक्फ बोर्ड की संपत्तियों से अलग होंगे बंजर, भीटा, ऊसर जमीन
बस्ती। जिले की वक्फ संपत्तियों में शामिल बंजर, भीटा, ऊसर में दर्ज जमीन को अब सरकारी खाते में दर्ज किया जाएगा। इनका इस्तेमाल सार्वजनिक स्वामित्व के तहत जनहित के कार्यों में होगा। वक्फ संपत्तियों की जांच 1122 राजस्व गांवों में चल रही है। डीएम ने बताया कि राजस्व गांवों में अभिलेखों की जांच के लिए चारों तहसीलों के एसडीएम को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट पांच अक्तूबर तक शासन को भेजी जानी है।
जिले में 5,453 वक्फ बोर्ड की संपत्तियां हैं। उनमें बस्ती सदर में सुन्नी की 4,770, शिया की 80, हरैया में सुन्नी की 374, रूधौली में सुन्नी की आठ और भानपुर में सुन्नी की 221 संपत्ति हैं। शासन के निर्देश पर तहसीलों को वक्फ संपत्तियों का ब्यौरा जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। सर्वे के दौरान सभी राजस्व गांवों के अभिलेखों का मिलान किया जाएगा। स्थलीय जांच करके वक्फ में दर्ज जमीनों व संपत्तियों का सत्यापन किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि सात अप्रैल 1989 को तत्कालीन सरकार ने सामान्य संपत्ति बंजर, भीटा, ऊसर आदि भूमि का इस्तेमाल वक्फ में करने का आदेश जारी किया था। उस कारण कब्रिस्तान, मस्जिद, ईदगाह आदि यदि सार्वजनिक जमीनों पर हैं तो उसे वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज किया जाएगा। इस आदेश के बाद बंजर, भीटा, ऊसर भूमि भी वक्फ संपत्ति के बतौर वक्फ बोर्ड के दस्तावेजों में दर्ज कर ली गई थीं। प्रदेश सरकार अब इन संपत्तियों के स्वरूप अथवा प्रबंधन में किए गए परिवर्तन से जुड़े शासनादेश को राजस्व कानून के विपरीत घोषित करके 33 साल पुराने आदेश को निरस्त कर दिया है।
जिले में वक्फ बोर्ड के पास अधिक जमीनें हैं। सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास तो केवल सदर तहसील में ही जमीन है। सुन्नी वक्फ बोर्ड की ज्यादा जमीनें खाली पड़ी हैं। इस कारण भू-माफिया की निगाह हमेशा इन पर लगी रहती है।
उप निदेशक व प्रभारी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी विजय प्रताप यादव ने बताया कि वक्फ की संपत्तियों के सर्वे के बारे में शासन से निर्देश मिल चुके हैं। डीएम की ओर से चारों तहसीलों में स्थलीय परीक्षण कराया जा रहा है। पांच अक्तूबर तक रिपोर्ट शासन को भेजनी है।