बस्ती। ग्रामीण बैंकों का शेयर पूंजीपतियों को बेचने और निजीकरण का रास्ता
खोलने के विरोध में देश के ग्रामीण बैंक कर्मी अरेविया एवं बैंक यूनियंस ऑफ
आरआरबी के आह्वान पर 10 और 11 मार्च को दो दिवसीय हड़ताल पर रहेंगे।
स्टेट
ग्रामीण बैंक इंपलाइज फेडरेशन के प्रांतीय महासचिव कामरेड केके श्रीवास्तव
ने यहां जारी विज्ञप्ति में बताया कि भारत सरकार ग्रामीण बैंक के स्वरूप
को नष्ट करने पर आमादा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रोें में पुन: सूदखोरों के
राज हो जाने, किसानों, ग्रामीणोें, श्रमिकों के साथ ठगी का खतरा मंडरा रहा
है।
मित्रा कमेटी की रिपोर्ट लागू कर कर्मचारियों की संख्या आधी
करने का कुचक्र रचने, सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने में पर्याप्त
कर्मचारियों, संसाधनों के अभाव को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि
ग्रामीण बैंक को समाप्त करने का षड्यंत्र बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बताया
कि ग्रामीण बैंक कर्मचारी राष्ट्रीयकृत बैंकों की तरह कार्य करते हैं
किंतु उनके साथ हर स्तर पर सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। भारतीय स्टेट
बैंक कर्मचारियों को तो स्नातक भत्ता दिया जा रहा है किंतु ग्रामीण बैंक
कर्मी इससे वंचित हैं।
केके श्रीवास्तव ने कहा कि नाबार्ड के आदेश
के बावजूद सफाई का कार्य करने वाले श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी भी नहीं दी
जा रही है न ही उनके अभिलेखों को अद्यतन किया जा रहा है। पूर्वांचल ग्रामीण
बैंक इंपलाई एसोसिएशन 4 सूत्रीय मांगों को लेकर पहली मार्च से काली पट्टी
बांधकर विरोध प्रदर्शन कर रहा है।
29 मार्च से महामंत्री मनीष
पांडेय के नेतृत्व में ग्रामीण बैंक गोरखपुर मुख्यालय पर अनिश्चित कालीन
धरना दिया जाएगा। महासचिव ने बताया कि 10 एवं 11 मार्च को प्रस्तावित
हड़ताल की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। ग्रामीण बैंकों में दो दिनों की
पूर्ण तालाबंदी के लिए सीधे तौर पर केंद्र सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं।