बस्ती। एक महीने से बंद पड़े आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के ताले बृहस्पतिवार को खुल गए। लंबित मांगों को पूरा किए जाने का आश्वासन मिलने के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) ने हड़ताल खत्म कर कामकाज शुरू कर दिया। स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच और टेलीमेडिसिन, स्क्रीनिंग समेत अन्य सेवाएं बहाल होने से मरीजों को राहत मिली है। हड़ताल के दौरान जिले के 256 केंद्रों पर एक लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
सीएचओ संगठन के अध्यक्ष प्रवेश पटेल के अनुसार, लंबित मांगों को लेकर 28 सितंबर से सीएचओ केंद्रों पर ताला बंद कर हड़ताल कर रहे थे। इसके चलते ब्लड समेत 14 प्रकार की जांच और टेलीमेडिसिन सेवाएं प्रभावित हो गई थीं। विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत एएनएम को जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन इससे स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह सुचारु नहीं हो सकीं। अब सीएचओ के काम पर लौटने से इन सेवाओं के फिर से नियमित होने की उम्मीद है। रोजाना करीब पांच हजार के आसपास जांच सेंटरों पर होती है। 31 दिन तक सेवा ठप होने से यह कार्य प्रभावित रहा।
तहसीलवार अधिकारियों ने की केंद्रों की जांच
शासन के निर्देश पर सीएमओ डॉ. राजीव निगम ने बंद केंद्रों की स्थिति का जायजा लेने के लिए तहसीलवार नोडल अधिकारी नामित किए थे। बृहस्पतिवार को डिप्टी सीएमओ, एसीएमओ और संबंधित क्षेत्रों के एमओआईसी ने केंद्रों का निरीक्षण किया। अधिकारियों के मुताबिक, अधिकांश केंद्र खुले मिले। करवा चौथ का व्रत रखने वाली कुछ महिला सीएचओ केंद्रों पर नहीं पहुंची। निरीक्षण की रिपोर्ट सीएमओ कार्यालय को सौंप दी गई है।
एएनएम करती रहेंगी अपना काम
डीसीपीएम दुर्गेश मल्ल ने बताया कि अधिकांश केंद्रों पर काम शुरू हो गया है। हड़ताल के दौरान लागू की गई वैकल्पिक व्यवस्था के तहत एएनएम अपने निर्धारित कार्य करती रहेंगी। वहीं, सीएमओ डॉ. राजीव निगम ने सभी सीएचओ को ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ाने के साथ स्क्रीनिंग और टेलीमेडिसिन सेवाओं को गति देने के निर्देश दिए हैं।
वेतन वृद्धि समेत कई बिंदुओं पर बनी सहमति
बस्ती। संगठन के अध्यक्ष प्रवेश पटेल ने कहा कि वेतन वृद्धि, कैडर निर्माण, आयुष्मान कार्ड की सुविधा और नियमित भर्तियों में वरीयता समेत कई प्रमुख मांगों पर सहमति बनी है। यह सीएचओ की एकजुटता और लंबे संघर्ष की जीत है।
वेतन संबंधी प्रस्ताव में 32 हजार रुपये के साथ आठ हजार रुपये की वृद्धि पर सहमति बनी है। इसके अलावा, सात हजार रुपये वेतन में जोड़ने और पांच हजार रुपये परफॉर्मेंस बेस्ड इंसेंटिव (पीबीआई) में बढ़ाने की बात कही गई है। अन्य मांगों में सीएचओ कैडर का गठन, सभी सीएचओ को आयुष्मान कार्ड की सुविधा, 25 हजार रुपये तक के वेतन पर ईपीएफ संबंधी व्यवस्था और नियमित भर्तियों में वरीयता देना शामिल है। धरना अवधि का वेतन भी नहीं काटा जाएगा। आंदोलन की सफलता सभी साथियों की एकजुटता, धैर्य और सहभागिता के चलते मिली। 31 दिनों तक चले संघर्ष में बड़ी संख्या में अधिकारियों ने लखनऊ में धरना देकर अपनी मांगों को उठाया। सहमति बनने के बाद आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया गया। अब सीएचओ को मांगों के अनुरूप निर्णय लागू होने का इंतजार है। संवाद