बनकटी(बस्ती)। क्षेत्र के हल्लौर नगरा (दीक्षापार) गांव में एक दशक पहले स्थापित 19 लाख का पशु चिकित्सालय दयनीय दशा का शिकार है। हालांकि अस्पताल पर डॉक्टर व फार्मासिस्ट की तैनाती है, मगर वे कभी-कभार ही यहां आते हैं, जिससे यहां की पूरी व्यवस्था चतुर्थ श्रेणी कर्मी के हवाले हो गई है। इन स्थितियों के चलते पशुपालकों का मोह भी अस्पताल से भंग हो गया है। भूले-भटके ही यहां पशुपालक आते हैं।
लाखों रुपये से स्थापित अस्पताल की दयनीय दशा की कहानी यहां का धूल धूसरित लैब, गंदा परिसर, शौचालय व किचन खुद बयां करते हैं। यहां स्थापित इंडिया मार्का हैंडपंप भी बेपानी है। तीन ग्राम पंचायतों के बीच स्थापित इस अस्पताल की उपयोगिता न के बराबर हो गई है। यह अलग बात है कि कागजों में यहां पशुपालक आकर पशुओं का इलाज कराते हैं, मगर धरातल पर ऐसा नहीं है। बनकटी स्थित राजकीय पशु अस्पताल के डॉ. प्रशांत कुमार व फार्मासिस्ट गणेश कुशवाहा को सप्ताह में तीन दिन यहां बैठने का निर्देश है, मगर ग्रामीणों का कहना है कि कब आते हैं और कब चले जाते हैं किसी को पता नहीं चलता। अस्पताल के चतुर्थ श्रेणी कर्मी वक्षराज सिंह ने बताया कि तीन दिन की ड्यूटी निभाने डॉक्टर व फार्मासिस्ट यहां आते हैं।
सीबीओ डॉ. अश्वनी कुमार ने बताया कि कर्मियों की कमी के चलते यहां डॉक्टर व फार्मासिस्ट की अस्थायी तैनाती बनकटी से कर दी गई है। सफाई आदि की जानकारी लेकर उसे व्यवस्थित कराया जाएगा। यदि ग्रामीण शिकायत करते हैं तो इसकी भी जांच कर ली जाएगी।