दुबौलिया क्षेत्र में नाव के सहारे खेती-किसानी के लिए जाते किसान संवाद
बस्ती। सरयू नदी का जलस्तर बृहस्पतिवार को खतरे के निशान से नीचे रहा, लेकिन पानी घटने के साथ ही नदी किनारे तेज कटान शुरू हो गई। इससे विक्रमजोत, दुबौलिया, कुदरहा और बहादुरपुर क्षेत्र के तटवर्ती गांवों में खेत तेजी से नदी में समा रहे हैं। उपजाऊ भूमि के कटने से किसान चिंतित हैं, जबकि प्रशासन ने संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाते हुए बचाव कार्य तेज कर दिए हैं।
केंद्रीय जल आयोग, अयोध्या के अनुसार शाम छह बजे सरयू का जलस्तर 91.93 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 92.73 मीटर से 80 सेंटीमीटर नीचे है। पिछले तीन दिनों से जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। हालांकि निचले इलाकों में अब भी पानी भरा हुआ है और बारिश होने पर जलस्तर फिर बढ़ने की आशंका बनी हुई है। दुबौलिया संवाद के अनुसार क्षेत्र में तटबंध विहीन गांवों के लोग फिलहाल बाढ़ के खतरे से राहत महसूस कर रहे हैं, लेकिन कटान ने नई चिंता खड़ी कर दी है। किसान अपनी उपजाऊ जमीन नदी में समाते देख परेशान हैं। पशुओं के लिए चारे का संकट भी पैदा हो गया है। कई किसान नाव के सहारे चारा लाकर पशुओं का पालन कर रहे हैं। कुदरहा और बहादुरपुर के संवेदनशील हिस्सों में भी बाढ़ और कटान की आशंका को देखते हुए सुरक्षा कार्य कराए जा रहे हैं। विक्रमजोत में गांवों के अस्तित्व पर संकट : विक्रमजोत विकास क्षेत्र में एलबी और बीडी तटबंधों के बीच बसे सैन्य पड़ाव, छतौना मांझा, कन्हईपुर, खेमराजपुर, शंभूपुर, लकड़ी, पकड़ी संग्राम और पकड़ी सूर्यवंश समेत कई गांव कटान की जद में हैं।
जलस्तर तेजी से घटने के कारण नदी किनारे की खेती योग्य भूमि तेजी से कट रही है, जिससे ग्रामीणों में दहशत है। ग्रामीण भगवानदीन, तेज नारायण निषाद, राहुल और रामकेश का कहना है कि यदि पिछले वर्ष क्षतिग्रस्त हुई कटानरोधी ठोकरों का समय रहते पुनर्निर्माण करा दिया जाता तो इस बार नुकसान काफी कम होता। उनका आरोप है कि गांवों की सुरक्षा के लिए प्रस्तावित कटानरोधी परियोजना को अब तक स्वीकृति नहीं मिल सकी। उधर, बाढ़ खंड की टीमें दोनों तटबंधों की लगातार निगरानी कर रही हैं।
सहायक अभियंता बृजेश सोनी ने बताया कि जलस्तर घटने से तटबंधों पर दबाव कम हुआ है, लेकिन सभी संवेदनशील स्थलों पर निगरानी जारी है और आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय किए जा रहे हैं।