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Basti News: धनुष टूटते ही जय श्रीराम के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा पंडाल

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दुबौलिया के विषेशरगंज कस्बे में चल रही श्रीराम कथा में श्रीराम लक्षमण सीता की झांकी- संवाद
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दुबौलिया। क्षेत्र के विषेशरगंज कस्बे के दुर्गा पूजा पंडाल में चल रही श्रीराम कथा में कनकेश्वरी ने श्रीराम विवाह, परशुराम प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। कहा कि मिथिला नरेश के लिए सौभाग्य की बात है कि श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न का विवाह एक ही मंडप में हुआ। विदाई का क्षण आया, साक्षात महालक्ष्मी सीता जनकपुरी छोड़कर जा रही हैं, मेरे जाने के बाद इन लोगों का क्या होगा। ऐसा सोच माता जी ने अपने आंचल में चावल भरकर चारों ओर बिखेर दिए। यही कारण है कि आज भी मिथिला में चावल बहुत पकता है।अयोध्या की प्रजा सीताराम का दर्शन कर रही है। दशरथ जी ने कहा कि यह पराई पुत्री हमारे घर आई है, जिस प्रकार से हमारी आंखों की रक्षा पलक करती है, उसी प्रकार सीता की रक्षा करना वधू लरिकनी पर घर आई। राखेहु नयन पलक की नाई। कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि दशरथ का राज्य प्रजातंत्र है। उनके मन में यह भाव आया कि अब श्रीराम का राज्याभिषेक कर दिया जाना चाहिये। नारायण को तो अभी नर लीला करनी है। वैसे भी किसी का संपूर्ण सुख तो काल से भी नहीं देखा जाता। संवाद
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