आर्य समाज, गांधीनगर का वार्षिकोंत्सव
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। आर्य समाज गांधीनगर के वार्षिकोत्सव को संबोधित करते हुए वैदिक प्रवक्ता पं. विमल वैदिक ने कहा कि नारी उत्थान में आर्य समाज की महत्वपूर्ण भूमिका है। वैदिक काल में नारियां पुरूषों के समतुल्य कार्य करती थी, यज्ञ कराती थी। लेकिन समय बदला और देश की अवनति के साथ नारियों को भोग विलास की वस्तु समझा जाने लगा। महर्षि दयानंद ने सबसे पहले कहा कि पुरूषो के बराबर ही नारियों को भी वेद पढ़ने का अधिकार है। आर्य समाज ने आर्य कन्या विद्यालय खोलवाकर नारी शिक्षा को बढ़ावा दिया।
वार्षिकोत्सव के तीसरे दिन आर्यसमाज मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ हुआ। यज्ञ का संचालन आर्य समाज के प्रधान हरिहर मुनि ने किया। सायंकालीन सत्र में वैदिक विद्वान रविंद्र आर्य ने कहा कि मांसहार मनुष्यों का भोजन नहीं है। मनुष्यों का दांत मांसाहार के अनुकूल नहीं बनाया गया है। मांसाहार से तामसिक वृत्तियां जागृत होती हैं । जिससें मनुष्य का शरीरिक, आत्मिक और मानसिक पतन होता है।
भजनोपदेशक देव शर्मा ने महर्षि दयानंद के गुणों का बखान करते हुए भजन गाया धन्य है तुमकों ए ऋषि तूने हमें जगा दिया। इस मौके पर मुरली धर भारती, राधेश्याम सिंह, सत्येद्र वर्मा आदि मौजूद रहे।