बस्ती। बारिश का सीजन...यानी शहरी क्षेत्र के लोगों की दुश्वारी। जलनिकासी का उचित प्रबंध न होने से बारिश के दौरान शहर का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। कहीं घरों में एकत्र पानी को निकालने की जुगत होती है तो कहीं सड़क पर घुटने तक पानी से होकर आने-जाने की मजबूरी... आदि दुश्वारियां गिना रहे नागरिक जलभराव का मंजर भूल नहीं पा रहे हैं। मानसून नजदीक देख हर कोई फिर चिंतित है कि दुश्वारियों भरा दिन आने वाला है। इस बार भी कोई जलनिकासी का कोई ठोस उपाय नहीं हुआ है। नतीजा बारिश का पानी सड़कों से लेकर घरों के अंदर तक पसरा रहेगा।
गांधीनगर क्षेत्र के महरीखांवा, पांडेय पोखरा, तुरकहिया मोहल्लों के नागरिकों को हर जलभराव की दुश्वारियों से जूझना पड़ता है। जबकि इस क्षेत्र से होकर ही शहर के मुख्य नाले गुजरते हैं। लेकिन उनका मोहल्लेवार नालियों से जुड़ाव न होने की वजह से पानी का बहाव नहीं हो पाता है। नई आबादी में तो जलनिकासी की कोई व्यवस्था ही नहीं है। जिससे बारिश के दिनों में सड़क और खुलेआम मैदान में पानी एकत्र होता है। नागरिकों की आवाजाही मुश्किलों के बीच होती है। इन मोहल्लों के सार्वजनिक गड्ढों और तालाबों पर भी अतिक्रमण कर लिया गया है। जिससे जलनिकासी की समस्या और जटिल हो गई है।
महरीखांवा में राह चलना होता है दूभर
जलभराव के संकट से महरीखांवा हर बार जूझता है। यहां के नागरिक कई-कई दिनों तक इस समस्या का सामना करते हैं। गांधीनगर मार्ग से जुड़े इस मोहल्ले की मुख्य सड़क ही बारिश में जलमग्न रहती है। सरस्वती विद्या मंदिर की गली में घुटने भर पानी एकत्र हो जाता है। स्कूली बच्चे बारिश के दिनों में जूते-मोजे निकालकर इस गली को पार करते हैं या वाहनों के सहारे विद्यालय पहुंचते हैं। केडीसी जाने वाले मार्ग पर भी जगह-जगह पानी लगा रहता है। जिनके मकान पुराने है, उनके कमरों और आंगन में भी पानी घुस जाता है। कुछ बचाव के लिए घर के चौखट को सड़क से ऊंचा बनवा लिए है। लेकिन घर से बाहर सड़क पर पानी में घुसकर ही जाना पड़ता है। केडीसी मार्ग पर स्थित गड्ढे पर अतिक्रमण होने से जलभराव की समस्या और जटिल बन गई है।
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पांडेय पोखरा के पास बसी आबादी में भी परेशानी
महरीखांवा से सटे पांडेय पोखरा कभी शहर का बड़ा जलाशय होता था। पिछले दो दशक से भूमाफिया की कुदृष्टि यहां पड़ी तो इस जलाशय का आयत घट गया है। अब यहां पांडेय पोखरा के नाम से नई कालोनी बस गई है। अधिकतर घरों को अभी ड्रेनेज सुविधा नहीं मिल पाई है। जिससे सामान्य दिनों में भी यहां जलनिकासी नहीं हो पाता है। बारिश होने पर अधिकांश घरों के सामने सड़क या कच्चे रास्ते पर पानी भर जाता है। फिर तो कई दिनों तक लोगों को संभलकर ही चलना पड़ता है।
तुरकहिया मोहल्ले की भी समस्या
तुरकहिया मोहल्ले में भी बारिश के समय जलभराव की समस्या गंभीर हो जाती है। राम प्रसाद की गली से तुरकहिया के लिए जाने वाला रास्ता जलमग्न हो जाता है। यहां नालियां कई जगहों पर चोक कर गई है। जिससे पानी का बहाव नहीं हो पा रहा है। बारिश होने पर मोहल्लेवासी पानी में घुसकर आते-जाते हैं। इसके अलावा तुरकहिया के सीमा क्षेत्र लौकियहवा और सटे हिस्से में भी बारिश का पानी इकट्ठा होता है। अधिक बरसात होने पर इन मोहल्लों का आपस जुड़ाव भी मुश्किल में पड़ जाता है।
शहरी क्षेत्र में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था सबसे जरूरी है। यह एक जटिल समस्या है। वार्डवार सर्वे करके ड्रेनेज सिस्टम का नए सिरे से खाका तैयार किया जाए। उसे मूर्त रूप देने के बाद ही इस समस्या से निजात मिल सकती है। -रागिनी शुक्ला, तुरकहिया
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हम लोग हर साल बारिश के समय पानी में घुसकर आते जाते हैं। घर के सामने सड़क पर पानी लगने से दिनचर्या भी प्रभावित होती है। पानी से डूबी ऊबड़ खाबड़ सड़क पर चलना यानी जान जोखिम में डालना है। लेकिन यह हम सभी की मजबूरी होती है। -अरविंद गौड़, तुरकहिया
अपने शहर में सीवर लाइन की नितांत आवश्यकता है। जलनिकासी की भूमिगत व्यवस्था बनाई जाए। इससे घरों से निकलने वाला पानी हो या बारिश का पानी दोनों आसानी से बह सकता है। इस समस्या से निजात दिलाने को जनप्रतिनिधियों को आगे आना चाहिए। -लालजी यादव, महरीखांवा, बस्ती।
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शहर में ड्रेनेज सिस्टम न के बराबर है। पुराने नालों पर ही जलनिकासी की व्यवस्था निर्भर है। उनकी भी साफ-सफाई नियमित नहीं हो पा रही है। इसलिए बारिश के समय जलभराव की समस्या तो रहेगी ही। इसका स्थाई निदान निकालना होगा। -हरिशंकर शुक्ल, महरीखांवा, बस्ती।
वर्जन
जलनिकासी की समस्या से निजात दिलाने के लिए नगर पालिका युद्ध स्तर पर जुट गई है। प्रमुख नालों की सफाई में मैन पावर और मशीन दोनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि बारिश शुरू होने से पहले शहर के सभी नालों के सिल्ट की सफाई कर ली जाए। -दुर्गेश्वर त्रिपाठी, ईओ, नगर पालिका परिषद, बस्ती।