लोगों ने दोनों को समझा-बुझाकर शांत कराया
संवाद न्यूज एजेंसी
हर्रैया। तहसील के फीडिंग कक्ष में तैनात लेखपाल के धारा संशोधन की पत्रावली पर पहले हस्ताक्षर करने और बाद में बिना किसी कारण के काट देने पर शुनिवार को एक अधिवक्ता से बहस हो गई। कहासुनी बढ़ता देख आसपास मौजूद लोग मौके पर जुट गए। दोनों को समझा-बुझाकर शांत कराया। बाद में नाराज लेखपालों ने कंप्यूटरीकृत खतौनी में काम बंद कर दिया। इससे घंटों तक लोगों को खतौनी नहीं मिल सकी।
अधिवक्ता यशवंत सिंह के जरिये एक काश्तकार के खतौनी में हुई त्रुटि के सुधार के लिए धारा 38 के तहत वाद दाखिल किया गया था। महीनों हुई सुनवाई के बाद हुए आदेश की पत्रावली फीडिंग कक्ष में तैनात लेखपाल सुनील कुमार तिवारी के समक्ष प्रस्तुत हुई। संबंधित लेखपाल ने पहले तो हस्ताक्षर कर दिए, मगर बाद में हस्ताक्षर काट दिया। इसी बात पर अधिवक्ता राजस्व कानूनगो राम बहाल पांडेय के साथ लेखपाल से पूछने गए तो वह उनकी बात अनसुनी कर बाहर निकलने लगा।
अधिवक्ता यशवंत ने जब लेखपाल से हस्ताक्षर काटे जाने का कारण जानना चाहा तो वह बिफर गए और अधिवक्ता से उलझ गए। दोनों में कहासुनी के साथ हाथापाई की नौबत आ गई। इसके बाद करीब एक घंटे तक खतौनी कक्ष का ताला बंद रहा। इससे खतौनी लेने पहुंचे किसानों को परेशानी हुई।
लेखपाल सुनील ने कहा कि कोई बात नहीं हुई।अधिवक्ता यशवंत सिंह ने बताया कि जब वह कह रहे हैं कि कोई बात नहीं हुई तो कोई बात नहीं। इस संबंध में तहसीलदार ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है।