बीएसए कार्यालय में मानकों का कम और शिक्षकों के हितों का अधिक ख्याल रखा जा रहा है। जिसके चलते किसी स्कूल में शिक्षकों की भरमार है किसी में अभाव। गौर ब्लॉक के कन्या बभनान स्कूल में आठ बच्चों को पढ़ाने के लिए तीन शिक्षक तैनात हैं। इसी ब्लॉक के चैनपुरवा में14 बच्चों पर पांच शिक्षक तैनात किए गए हैं। बनकटी के कांची डडवा में बच्चों की संख्या तो शून्य है, मगर यहां पर भी एक शिक्षक तैनात है। इसी ब्लॉक के कमोखर नवीन स्कूल में दो बच्चों के लिए दो अध्यापक हैं। सदर ब्लॉक डिडौआ स्कूल में 27 बच्चों का जिम्मा छह शिक्षकों पर है।
वहीं पर सल्टौआ के रामपुर मड़री में 223 बच्चे नामांकित हैं, मगर यहां पर एक शिक्षक तैनात हैं। जिले में कोई ऐसा ब्लॉक नहीं, जहां पर शिक्षकों की तैनाती में नियमों की अनदेखी नहीं की गई है। अभिभावकों की माने तो बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता को खराब करने में विभाग के लोगों का ही सबसे बड़ा हाथ है। विभाग के गैर जिम्मेदाराना रवैये के चलते सरकारी स्कूलों में अभिभावक बच्चों का दाखिला कराना नहीं चाहते। विभाग के कई अधिकारी भी इस बात को मानते हैं कि अगर शिक्षकों की तैनाती मानक के अनुसार कर दी जाए तो काफी हद प्राइमरी स्कूलों की शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।
कुदरहा के शिवपुर में 66 बच्चों को पढ़ाने के लिए छह शिक्षक तैनात हैं, वहीं इसी स्कूल के बगल में महुआपार में 132 बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा एक शिक्षक पर है। यही स्थित कुदरहा के अमरौना की है, यहां पर शिक्षक तो पांच हैं, मगर बच्चें की संख्या मात्र 66, वहीं बगल के स्कूल रमनातौफिर में 104 बच्चों को पढ़ाने के लिए एक शिक्षक नियुक्त है।