शिक्षित नारी से ही विकसित राष्ट्र की परिकल्पना
अपराजिता मुहिम के तहत आयोजित संगोष्ठी में अतिथियों ने कहा
अमर उजाला फाउंडेनशन की ओर से जीजीआईसी में कार्यक्रम
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। एक शिक्षित नारी दो परिवारों को ही नहीं संवारती बल्कि समाज की सोच बदलने में योगदान करती है। शिक्षित नारी से ही एक विकसित राष्ट्र की परिकल्पना संभव है। यह कहना है प्रधानाचार्य नीलम सिंह का। वह अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित महिला शिक्षा संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं।
राजकीय कन्या इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ने कहा कि 21वीं सदी में उस हर क्षेत्र में महिलाएं पहुंच चुकी हैं जो पुरुषों के लिए माना जाता था। अंतरिक्ष हो या हवाई जहाज चलाना अथवा फोर्स ज्वाइन कर बॉर्डर पर सीमा की रखवाली करना हर क्षेत्र में महिलाएं सक्रिय हैं। राजनीति में भारत में महिलाओं का पराक्रम किसी से छिपा नहीं है। ऐसे में हर परिवार अपने बेटे के समान ही बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाएं। ताकि परिवार, समाज और राष्ट्र विकास की ऊचांइयों को छू सके। जीजीआईसी में हिंदी की शिक्षक डॉ. कविता ने कहा कि पौराणिक काल से ही नारियों की सबलता के प्रमाण मिलते हैं। किन्हीं परिस्थितियों बस स्थिति में गिरावट आई। इसके बाद कवियों ने नारी तुम केवल श्रद्धा हो, अबला आदि शब्दों से संबोधित किया लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं है। नारी शक्ति की प्रतीक है। घर से लेकर राष्ट्र तक अपना परचम लहरा चुकी है। सिर्फ जागरूक होने की आवश्यकता है।
जागरूकता से आगे बढ़ेगी नारी: मांडवी
जीजीआईसी में शिक्षक मांडवी सिंह कहती हैं कि नारी शिक्षा के प्रति जागरूकता जरूरी है। क्योंकि जागरूकता के चलते हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। यह जागरूकता माता-पिता से शुरू होता है। जो बगैर भेदभाव बेटियों को भी उच्च तालीम दिलाएं। आगे बढ़ने में मदद करें।
वैदिक काल से ही नारी सबला : पूर्णिमा
नारियों की स्थिति वैदिक काल से ही मजबूत रही है। आज भी सशस्त्र सेना से लेकर फाइटर प्लेन तक चलाने में सक्षम है। जरूरत है सिर्फ प्रारंभिक सहयोग देने की। यह कहना है शिक्षिका पूर्णिमा श्रीवास्तव का। अमर उजाला का यह कार्यक्रम महिलाओं के लिए विशेष सहयोगी है।
भेदभाव से पिछड़ती हैं लड़कियां: अंजू
प्रकृति जब भेदभाव नहीं करती तो हम लोगों को भी अधिकार नहीं है कि बेटे और बेटी में फर्क रखें। विशेषकर शिक्षा के क्षेत्र में परिवार की ओर से भेदभाव महिलाओं के पिछड़ेपन का कारण बनता है। यह कहना है अंजू अफसा का। कहती हैं कि ऐसे भेदभाव वाली सोच को बदलना होगा।
ऐसे कार्यक्रम से बढ़ेगा आत्मविश्वास: डॉ. सबीहा
जीजीआईसी की शिक्षिका डॉ. सबीहा मुमताज कहती हैं कि अपराजिता मुहिम अमर उजाला की सराहनीय पहल है। महिलाओं के लिए चलाया जा रहे इस अभियान से निश्चित ही जागरूकता आएगी। ऐसे कार्यक्रमों से मनोबल बढ़ता है। समाज में महिलाओं के प्रति अपराधों पर अंकुश लगेगा।