बस्ती। जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) की 25 दिन से जारी हड़ताल के कारण ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हैं। करीब 250 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के संचालन पर इसका असर पड़ा है। सीएमओ ने केंद्रों के संचालन की जिम्मेदारी नियमित एएनएम को सौंपी है लेकिन वे स्क्रीनिंग के लिए प्रशिक्षित नहीं हैं। ऐसे में वे टीकाकरण करें या स्क्रीनिंग इसको लेकर वे असमंजस में हैं।
वहीं, कुछ केंद्रों पर ताला लटके होने से मरीजों को बिना जांच और दवा के लौटना पड़ रहा है। टीकाकरण और एनसीडी (गैर-संचारी रोग) स्क्रीनिंग का काम भी प्रभावित हो रहा है। सीएचओ संघ के जिलाध्यक्ष प्रवेश पटेल ने बताया कि अलग कैडर बनाकर नियमितीकरण की स्पष्ट नीति लागू करने, आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की ऑपरेशनल गाइडलाइन के अनुसार मानदेय समेत कई मांगें लंबित हैं। मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी।
इधर, अधिकतर एएनएम हड़ताल से वापस लौट आई हैं लेकिन कुछ अब भी कार्य नहीं कर रही हैं। सीएचओ की अनुपस्थिति में एएनएम को आरोग्य मंदिरों के संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। इस आदेश को लेकर एएनएम के सामने सवाल है कि टीकाकरण के साथ स्क्रीनिंग का काम कैसे करें, जबकि उन्हें इसका प्रशिक्षण नहीं मिला है। प्रवेश पटेल ने कहा कि बिना प्रशिक्षण के एएनएम से स्क्रीनिंग समेत अन्य कार्य कराना उचित नहीं है।
उन्होंने सरकार से मांगों पर निर्णय लेकर सीएचओ की हड़ताल समाप्त कराने की अपील की। बृहस्पतिवार को पोखरनी, वैष्णोपुर, कुसौरा, अगौना, छावनी, चिलमा और सैफाबाद स्थित जन आरोग्य मंदिर बंद रहे। इन केंद्रों पर पहुंचे मरीजों को जांच और दवा के बिना लौटना पड़ा। स्क्रीनिंग सेवा अभी प्रभावित है। ऑनलाइन कार्य और टेलीमेडिसिन की सुविधा भी मरीजों को नहीं मिल पा रही है।
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अधिकतर एएनएम हड़ताल से वापस आ चुकी हैं। सीएचओ के लौटने तक नियमित एएनएम को आरोग्य मंदिरों के संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। टीकाकरण और स्क्रीनिंग सेवाएं प्रभावित न हों, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। बच्चों का टीकाकरण छूटने से बचाने के लिए अलग-अलग तिथियों पर भी टीकाकरण कराया जा रहा है। -डॉ. राजीव निगम, सीएमओ, बस्ती।