आज खास आंगनबाड़ी संघ का परियोजना कार्यालय पर प्रर्दशन।
सोमवार को जिले में 27 दिन से बंद पड़े आंगनबाड़ी केंद्रों के ताले खुल जाएंगे। बापू प्रतिमा के समक्ष रविवार को ‘आंचल फैलाओ, अधिकार मांगो’ आंदोलन कर महिला आंगनबाड़ी कर्मचारियों ने हक मांगा। महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की जिलाध्यक्ष रतन बाला श्रीवास्तव ने आंदोलन को एक माह के लिए स्थगित करने की घोषणा करते हुए कहा कि प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर यह निर्णय लिया गया है। मानदेय बढोत्तरी और राज्य कर्मचारी के समान दर्जा लिये बिना अब महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी मोदी और अखिलेश सरकार का पीछा नहीं छोड़ेंगी। सोमवार से पूर्ववत कार्य किया जाएगा।
सांसद जगदंबिका पाल ने महिला आंगनबाड़ी कर्मचारियों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि वे अधिकार दिलाने के लिए सड़क से संसद तक आवाज उठाएंगे। कहा कि केंद्र सरकार निश्चित रूप से उनकी मांगो पर विचार कर रचनात्मक पहल करेगी। आंदोलन के दौरान तीन आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की मौत पर श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। मांगे न मानी गई तो पुन: आर-पार का संघर्ष किया जाएगा।
संघ की जिलाध्यक्ष रतनबाला श्रीवास्तवा ने कहा कि जिस मुस्तैदी के साथ महिला आंगनबाड़ी कर्मचारियों ने तकरीबन एक माह तक आंदोलन जारी रखा। मंडल अध्यक्ष शिवसागर पांडेय ने कहा कि एकजुटता को बनाए रखने की जरूरत है। संरक्षक का. के.के. श्रीवास्तव ने कहा कि निश्चित रूप से ऐतिहासिक आंदोलन का सुखद परिणाम सामने आएगा। आंदोलन की आग को बनाये रखना होगा। इस आंदोलन की आवाज नीति निर्माताओं तक पहुंच चुकी है।
आंदोलन के अंतिम दिन गांधी प्रतिमा के समक्ष ‘आंचल फैलाओ, अधिकार मांगो’ आंदोलन में सरोज शुक्ला, मिथलेश पाण्डेय, विमला देवी, आशा सिंह, रानी सिंह, ऊषा शर्मा, सरला चौधरी, सुनीता सिंह, कुसुम चौधरी, इंद्रमती, कोकिला मिश्र, भाग्यमनी दूबे आदि रहीं।