थोक बाजार से शुरू होता है खेल, गांव-गांव तक छाया
बाइक व छोटे लोडर से फेरी लगाकर खपाते हैं मिश्रित दाल
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा रही अक्सा (खेसारी) युक्त अरहर दाल में मिलावट के पीछे तगड़ा खेल चल रहा है। दरअसल, थोक बाजार से ही यह खेल शुरू हो जाता है। फुटकर व्यवसायी थोक में खरीदकर इसे अरहर की दाल बता कर बेंच रहे हैं। इस खेल को पकड़ पाने में सिस्टम भी खुद को फेल दिखा रहा है। कारण है, खेसारी दाल का दुकान से बाहर रखा जाना।
दअसल, अक्सा दाल को बाहर रखने के पीछे का उद्देश्य है कि छापा पड़े तो नमूनों की जांच गोदाम या दुकान में रखी दाल की होती है। अन्यत्र रखी लावारिस दाल को जिम्मेदार पूछते भी नहीं। न ही कोई अढ़ाती का नाम खुलकर बोलता है। ऐसे में धंधेबाज बेखौफ होकर अक्सा मिली अरहर की दाल खपाकर जनपद के लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। लोगों की मानें तो इस खेल में जिम्मेदारों की भी मिलीभगत है। यही वजह है कि सब कुछ उनकी आंखों के सामने होने पर भी उनकी नजर नहीं पड़ रही है। यदि खाद्य सुरक्षा की टीम जांच करने निकलती है तो उन्हें गोदाम या दुकान में रखी सही अरहर की दाल का सैंपल भरा दिया जाता है। जानकारों की मानें तो यह पूरा खेल जिम्मेदारों व अढ़ातियों की आपसी समझ से चल रहा है।
जनपद में आजकल मोटर साइकिल व छोटे लोडर पर सामान रखकर गांव, कस्बा व शहर में बेचने का चलन चल रहा है। गांवों व शहर में मोटर साइकिल पर छोटा सा स्पीकर लगाकर दालें व मेवे बेचे जा रहे हैं। यह मोटर साइकिल सवार दालों को बाजार के दामों से काफी कम में बेचते हैं। सस्ता होने कारण लोग इन्हें बिना जांचें-परखे ही खरीद ले रहे हैं।
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खेसारी के नाम से भी जानी जाती है अक्सा की दाल
- राष्ट्रीय नवोन्मेषी पुरस्कार प्राप्त राममूर्ति मिश्र बताते हैं कि अक्सा की दाल को खेसारी के नाम से भी जाना जाता है। आमतौर पर यह मटर व मसूर फसल के साथ खेतों में स्वत: ही उग आता है। इसे काटकर जानवरों को खिलाने पर वह बीमार पड़ जाते थे। जब कास्तकारों ने इसके बारे में जानना शुरु किया तो वह इससे मुंह मोड़ लिए और खेत में उगने पर उखाड़कर फेंकना शुरु कर दिए। अब यह जिले में कहीं-कहीं ही दिखती है।
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बोले नागरिक
- बाजार में अरहर की दाल 170 रुपये किग्रा मिल रही है। जबकि फेरी वाले 120 रुपये में दे रहे हैं। बाजार से सस्ता होने के कारण हम लोग खरीद लेते हैं।
जनार्दन शुक्ल, नड़ार
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आजकल अरहर की दाल 145 से 170 रुपये तक दुकान पर मिल रही है। फेरीवाले तो 110-120 रुपये में बेच रहे रहे हैं। एक बार खरीदा था तो उसमें अक्सा निकला तब से बंद कर दिया।
संजय कुमार यादव, सुरसा
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