संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। गाजियाबाद में वकीलों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में बृहस्पतिवार को जनपद के अधिवक्ता न्यायिक कार्य में सहयोग नहीं किया। गाजियाबाद के जिला जज द्वारा अधिवक्ताओं के ऊपर पुलिस बल का प्रयोग कर बर्बरता पूर्ण किए गए लाठी चार्ज की निंदा की गई और आक्रोश जताया। मुकदमों की पैरवी करने वकील अदालतों में नहीं गए। अधिवक्ता संगठनों का कहना है कि कई जिलों में गाजियाबाद के समर्थन में आंदोलन किया जा रहा है। जिसके समर्थन में जनपद के अधिवक्ता भी न्यायिक कार्य का समर्थन नहीं करने का निर्णय लिया है। वकीलों का कहना है कि वह अपने मुवक्किल की बात कहने के लिए कोर्ट में हाजिर होते हैं, लेकिन वकीलों का सिर फोड़ दिया जाता है। व्यापक भ्रष्टाचार के माहौल में वकीलों को काम करना कठिन हो गया है। सर्व सम्मत से यह प्रस्ताव पारित किया गया कि गाजियाबाद की घटना के विरोध में वकील न्यायिक कार्य में सहयोग नहीं कर पाएंगे। इस अवसर पर विनय कुमार बक्शी, राजकुमार श्रीवास्तव, शेषनाथ पाठक, रक्षाराम शुक्ल,
अजय प्रताप सिंह, मारूत कुमार शुक्ल, जवाहरलाल मिश्र, रविशंकर शुक्ल, महेन्द्र उपाध्याय, अरविंद नरायण पांडेय, रविप्रताप सिंह, अजय पांडेय, देवव्रत उपाध्याय, दिग्विजय सिंह, नागेंद्र मिश्रा, अखिलेश दूबे, विमलेंद्र त्रिपाठी, राम विनय शुक्ल, अवनीश कुमार, शत्रुघन पांडेय, अरविंद दूबे, अजय दूबे, राधेश्याम यादव, लक्ष्मीकांत मौर्य, राघवेंद्र प्रसाद चौधरी, अमरसेन सिंह, अली हसन, जोखू प्रसाद यादव, मनोज पांडेय आदि मौजूद रहे।