बस्ती। छेना और राजभोग के साथ रंगीन नमकीन में भी मिलावट का धंधा चकम रहा है। जानकारों की माने तो छेना और राजभोग पाउडर वाले दूध से तैयार कर शादी-विवाह में खपाया जा रहा है। साथ ही नमकीन और अन्य खाद्य पदार्थों में रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा है। चिकित्सक इसके सेवन से लोगों की सेहत बिगड़ने की बात कह रहे हैं।
विभागीय जानकारों ने बताया कि मिठाई और नमकीन में एक किलोग्राम में अधिकतम 100 मिलीग्राम तक फूड कलर मिलाने की अनुमति है, लेकिन दुकानदार मिठाई-नमकीन को आकर्षक बनाकर रेट बढ़ाने के लिए उसमें प्रति किलोग्राम 10 ग्राम से अधिक सिंथेटिक रंग मिला रहे हैं। धंधेबाजों ने छेना के साथ रंगीन राजभोग मिठाई को भी नहीं छोड़ा है।
मिठाई को रंगीन बनाने के लिए दुकानदार उसमें सिंथेटिक रंग डाल रहे हैं, जो लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। यही हाल अन्य खाने-पीने की वस्तुओं का भी है। मिठाई और नमकीन में रंगों के इस अत्यधिक प्रयोग का सीधा असर लिवर पर पड़ रहा है। गैस्ट्रो विशेषज्ञों के यहां लिवर संक्रमण के जो मरीज आ रहे हैं, उनमें सबसे अधिक वही हैं, जो हर दिन बाहर से कुछ न कुछ खाते रहते हैं। बताया गया कि बाजार की मिठाई में मिलावट तो है ही, सिंथेटिक रंग भी मिलाए जा रहे हैं। जबकि, दाल और सब्जी समेत अन्य भोज्य पदार्थों में किसी भी प्रकार का रंग मिलाना प्रतिबंधित है।
जनरल सर्जन डॉ. विजय तिवारी ने बताया कि सिंथेटिक रंग हर तरह से नुकसानदेह होता है। मिठाई में मिला रंग से लिवर में घाव हो सकता है। लिवर इंफेक्शन के हर दिन मामले आते हैं। इसमें सबसे अधिक मरीज वे होते हैं, जो हर दिन दुकानों पर कुछ न कुछ खाते रहते हैं। पैकेटबंद नमकीन, चिप्स आदि में रंगों का इस्तेमाल होता है। इसीलिए लोगों को पैकेटबंद सामान की खरीदारी करते सर्तकता बरतनी चाहिए। शादी विवाह के आयोजनों में हर प्रकार के खाद्य पदार्थ में मिलावट की आशंका होती है।