बस्ती। होली में गुझिया न हो तो पर्व अधूरा सा लगता है। इसके चलते होली का त्योहार नजदीक आते ही बाजार में गुझिया बनाने में प्रयुक्त सामग्री की मांग बढ़ गई है। इसी का फायदा मिलावटखोर उठाते हैं। वे मैदा में चॉक पाउडर या स्टार्च, बेसन में मक्के का आटा और सूची में खराब चावल का टुकड़ा मिलाकर मोटा मुनाफा कमाते हैं। जानकारों का कहना है कि खराब तेल और मिलावटी खोआ से तैयार गुझिया धंधेबाज आसानी से खपा रहे हैं, चूंकि, निगरानी तंत्र सुस्त पड़ गया है। धंधेबाज इसी का फायदा उठाकर मिलावटी सामग्री धड़ल्ले बिकवा रहे हैं।
मिलावटी खोआ जरवल रोड और पचपेड़वा से जबकि पनीर अंबेडकरनगर से मंगवा कर उसे धंधेबाज मजबूत नेटवर्क के साथ खपा रहे हैं। बताया गया कि सहालग और त्योहार समेत अन्य अवसर पर बिकने वाले खाद्य पदार्थों में मिलावट का धंधा तेज हो जाता है। खाद्य कारोबारियों का कहना है कि बाजार में कम कीमत पर मिलने वाले सरकारी दुकान के टूटे और खराब चावल को धंधेबाज आधे रेट में खरीद ले रहे हैं। धंधेबाजों को यह चावल 12 से 15 रुपये किलो की दर पर मिल जाता है। इसे पीसकर सूजी और मैदा में मिला देते हैं। इसकी रंग और बनावट में मामूली अंतर होने के चलते आम उपभोक्ता उसकी पहचान नहीं कर पाते हैं।
इसी तरह चने के बेसन में मक्के का आटा के अलावा मटर का आटा भी मिलाया जा रहा है, जिससे लागत घट जाती है और मुनाफा बढ़ जाता है। खाद्य विभाग की तरफ से पिछले होली पर एकत्र नमूनों की जांच रिपोर्ट मिलावट की पुष्टि कर रही है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की तरफ से लिए गए बेसन के नमूने फेल आए थे। उसमें मिलावट की पुष्टि हुई थी। इसी तरह सूजी के दो और मैदा के एकत्र तीन नमूने प्रयोगशाला की जांच में फेल हो गए हैं। अधोमानक मिले थे। व्यापारियों का कहना है कि होली पर जिले में औसतन 400 टन मैदा व करीब 50 टन बेसन की खपत होती है। त्योहार में यह दोगुना हो जाता है।
वहीं 100 टन से अधिक करीब सूजी की खपत होती है। इसी प्रकार चीनी की खपत अधिक रहती है। बस्ती में सूजी, मैदा तो लोकल से जबकि ऑयल और अन्य सामग्री गोरखपुर, लखनऊ, कानपुर व दिल्ली से आता है। वहीं, गुझिया की खरीदारी करके ले जा रहे लवकुश ने बताया बाजार की गुझिया में खराब तेल दिख रहा है। उनके अंदर मिला मावा व ड्राई फ्रूट भी खराब हैं, तोड़ने पर उसमें से महक आती है। जानकारों का कहना है कि होली के बहार में खराब सामग्री को गुझिया में मिलाकर खपा दे रहे हैं।
दुकानदार अमित जायसवाल ने बताया कि बाजार में गुझिया के कई प्रकार उपलब्ध हैं। इनकी कीमत 400 रुपये किलो से 580 रुपये किलो तक है।
सूखे मेवे और उच्च गुणवत्ता वाली गुझिया 590 रुपये से 650 रुपये किलो तक बिक रही हैं। विजय ने बताया कि उपहार पैक में अब लोग मिठाई के बजाय गुझिया को प्राथमिकता दे रहे हैं।
होली के उपहार पैक में सूखे मेवे, देशी घी और विशेष स्वाद वाली गुझिया की पैकिंग सबसे ज्यादा की जा रही है। इसके साथ ही मूंगफली बर्फी, काजू कतली, मिल्क केक, नारियल बर्फी आदि की मांग भी बनी हुई है।