फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चार गुना अधिक गन्ना पैदावार के लिए अपना रहे रिंगपिट विधि

विज्ञापन
विज्ञापन
चार गुना अधिक गन्ना पैदावार के लिए अपना रहे रिंगपिट विधि
विज्ञापन

बस्ती। शरदकालीन मौसम में चल रहे गन्ने की बुवाई के लिए चीनी मिल मुंडेरवा प्रबंधन के अभियान का असर दिखने लगा है। पहली बार क्षेत्र के किसानों ने रिंगपिट विधि से बड़े पैमाने पर गन्ने की बुआई की है। इससे किसानों को गन्ने की औसत से चार गुना अधिक उपज मिल सकेगी।
शासन ने मुंडेरवा परिक्षेत्र में गन्ने का क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए कार्यदाई संस्था एलएसएस को जिम्मेदारी दी है। मौजूदा शरदकालीन मौसम में गन्ना बुआई का 937 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है। इसमें से रिंगपिट विधि से 106 हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ना बुआई करने का लक्ष्य है। रिंगपिट विधि से गन्ना बुवाई का अब तक यह सबसे बड़ा लक्ष्य है। नवंबर में अब तक 70 हेक्टेयर क्षेत्र में रिंगपिट विधि से गन्ने की बुवाई की जा चुकी है।
विज्ञापन

मुंडेरवा मिल परिक्षेत्र के बनकटी ब्लॉक के पुरनपुर गांव के प्रगतिशील किसान रामदीन चैधरी ने कहा कि पहली बार हमने 0.126 हेक्टेयर क्षेत्र में रिंगपिट विधि से गन्ने की बुआई की है। इसके लिए कार्यदाई संस्था एलएसएस के कर्मचारियों ने प्रोत्साहित किया।
गांव के रामप्रकाश चौधरी ने भी तकरीबन 0.150 हेक्टेयर क्षेत्र में रिंगपिट से गन्ने की बुवाई की है। गांव के सात हेक्टेयर क्षेत्र में अब तक रिंगपिट से गन्ने की बुआई की जा चुकी है। अभी बुआई लगातार चल रही है।
कैथवरा के प्रगतिशील किसान अशोक तिवारी ने कहा कि हमने पहली बार रिंगपिट विधि से 0.125 हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की बुवाई की है। शोभनपार के किसान रामधन चौधरी ने कहा कि एक एकड़ में रिंगपिट विधि से गन्ने की बुआई की है।
चीनी मिल के प्रधान प्रबंधक ब्रजेंद्र द्विवेदी ने कहा कि गन्ने की पैदावार बढ़ाने के लिए नई तकनीक पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए किसानों को बीज, कृषि उपकरण, रसायन, उर्वरक आदि अनुदानित दर पर उपलब्ध कराए जाते हैं। कार्यदाई संस्था को गन्ना विकास के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए निर्देशित किया गया है।
विज्ञापन

कार्यदाई संस्था एलएसएस के महाप्रबंधक (गन्ना) डॉ. वीके द्विवेदी ने कहा कि क्षेत्र के किसानों में रिंगपिट विधि से गन्ना बुवाई के प्रति उत्साह देखने को मिल रहा है। इससे कम लागत में किसानों को अधिक पैदावार मिलने के साथ ही सहफसली खेती करने में सुविधा मिलेगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें