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Basti News: सावधानी हटी, दुर्घटना घटी... लिख तो देते

Sat, 19 Aug 2023 11:44 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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हाइवे पर बिजरा ​​स्थित डेंजर जोन से निकलता स्कूली वाहन।
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बस्ती। ग्लोबल समिट को बस्ती में तगड़ा झटका लगा है। जिले के गौर ब्लॉक क्षेत्र के धोबहिया में चयनित मिनी औद्योगिक आस्थान की जमीन विवादों में उलझ गई है। इसको अपने हक में करने के लिए तीन विभाग आमने-सामने हो गए हैं। गौर थाना, हर्रैया तहसील और जिला उद्योग केंद्र में जमीन के स्वामित्व को लेकर ठन गई है, जिससे लघु उद्यमियों का उद्योग लगाने का सपना यहां चकनाचूर होता नजर आ रहा है, जबकि इस मिनी औद्योगिक आस्थान के लिए छोटे उद्यमियों से इंवेस्टर्स समिट के दौरान एमओयू पर साइन भी करा लिए गए हैं। अब इन्हें हाथ पर हाथ रखकर विवाद सुलझने का इंतजार करना पड़ रहा है।
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जिला उद्योग केंद्र के दस्तावेजी रिकार्ड के अनुसार गौर ब्लॉक के धोबहिया में राजकीय मिनी औद्योगिक आस्थान के लिए 36 साल पहले 18 फरवरी 1987 को 2.82 एकड़ सरकारी भूमि अधिग्रहीत की गई थी। इसमें छोटे उद्यम के लिए 50 प्लाट आवंटित होने हैं। जिला उद्योग केंद्र की ओर से इस मिनी आस्थान को इंवेस्टर्स समिट में छोटे उद्यमियों को शामिल किया गया। जनपद के कुछ छोटे उद्यमी इस बार के समिट में यहां उद्योग लगाने के लिए सहमत हुए। उनसे एमओयू पर साइन कराने की प्रक्रिया पूरी कराई गई।
उद्योग केंद्र को भी यह उम्मीद हुई कि वर्षों से वीरान पड़े मिनी औद्योगिक आस्थान धोबहिया भी अब उद्योगों से गुलजार होगा। इस ओर कदम भी बढ़ाए गए। उद्यमियों को यहां स्थापित करने के उद्देश्य से मिनी आस्थान के भूखंड के चारों तरफ बाउंड्रीवाॅल का कार्य भी शुरू करा दिया गया। तभी एसडीएम हर्रैया की ओर से राजस्व टीम को भेजकर निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई। इसके बाद यह भूखंड विवादों में उलझता चला गया। तहसील और उद्योग केंद्र के बीच स्वामित्व को लेकर पेंच फंसा ही था, कि तीसरे पक्षकार के रूप में गौर थाना भी कूद पड़ा है।
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पुलिस महकमे की ओर से दी गई दलील के अनुसार संबंधित भूखंड गौर थाने के लिए राजस्व विभाग से आवंटित हो चुकी है। अब भूखंड के स्वामित्व को लेकर तीनों विभाग आपस में उलझ गए हैं। इसका खामियाजा उद्यमियों को भुगतना पड़ रहा है। यहां उनके उद्योग लगाने की तैयारी अधर में लटक गई है।
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जेडी उद्योग ने लिखा पत्र
जिला उद्योग केंद्र के मिनी औद्योगिक आस्थान धोबहिया के भूखंड का विवाद गहराता देख जेडी उद्याेग के एचपी सिंह को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने डीएम, डीसी उद्योग, एसडीएम व तहसीलदार हर्रैया को पत्र लिख कर बाउंड्रीवाल के निर्माण को शुरू कराने का अनुरोध किया है। मगर बात अभी बन पाई है। प्रशासन की ओर से जमीन के स्वामित्व को लेकर कोई निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है। इससे उद्यमियों की उलझनें बढ़ी हुई हैं।

प्रभारी मंत्री के सामने भी उठ चुका है मुद्दा
पिछले सोमवार को कलक्ट्रेट सभागार में समीक्षा बैठक कर रहे जनपद के प्रभारी व प्रदेश के एमएसएमई मंत्री राकेश सचान के सामने भी मिनी औद्योगिक आस्थान धोबहिया के भूखंड संबंधी विवाद का मुद्दा उठाया गया। इस पर मंत्री ने औद्योगिक आस्थान की भूमि पर निर्माण कार्य रोके जाने पर नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा कि यह मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है। निर्देश दिए कि डीएम मामले में हस्तक्षेप कर तत्काल इसका निराकरण कराएं।


डीएम ने गठित की चार सदस्यीय टीम

धोबहिया में राजकीय मिनी औद्योगिक आस्थान की जमीन के विवाद को सुलझाने के लिए डीएम ने चार सदस्यीय टीम का तत्काल गठन किया। इसमें मुख्य राजस्व अधिकारी ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी अध्यक्ष और सदस्य के रूप में एसडीएम हर्रैया गुलाब चंद्र, उपायुक्त उद्योग हरेंद्र कुमार यादव, क्षेत्रीय प्रबंधक यूपीएसआईडीसी सुभाष चंद्र पांडेय शामिल किए गए हैं। अगले सप्ताह बैठक होनी प्रस्तावित है।

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प्रस्तावित उद्यम- एक
पाइप की फैक्ट्री लगाने की थी योजना
मिनी औद्योगिक आस्थान धोबहिया में स्प्रिंकलर पाइप की फैक्ट्री लगाने की योजना थी। इसके लिए इंवेस्टर्स समिट पर एमओयू पर साइन भी कराया गया। पूरी शिद्दत से फैक्ट्री लगाने की तैयारी चल रही थी। उम्मीद थी कि सरकार की मदद से एक छोटा उद्यम लगाने में सफल हो जाएंगे। अब यह सपना अधूरा लग रहा है। -अनिल सिंह रैकवार, उद्यमी।

प्रस्तावित उद्यम- दो
बेकरी उद्योग के लिए धोबहिया के मिनी औद्योगिक आस्थान को चुना था। प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी थी। सरकारी आस्थान होने के नाते आवागमन, बिजली, पानी, सड़क आदि की बेहतर सुविधा मिलती, जिससे उद्योग को पनपाने में काफी मदद मिलती। मगर यहां पहुंचने से पहले ही जमीन को लेकर विवाद शुरू हो गया।
-हरीश शुक्ल, उद्यमी।
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प्रस्तावित उद्योग- तीन
धोबहिया में फर्नीचर उद्योग लगाने का प्लान था। एक जनपद- एक उत्पाद योजना के तहत इस उद्योग को बढ़ावा भी दिया जा रहा है। फिलहाल मंशा पर पानी फिर गया है। प्रशासन पहले जमीन का विवाद सुलझाए तब जाकर उद्योग स्थापित करने की उम्मीद जगेगी। एमओयू पर साइन कराने से पहले उद्योग केंद्र को जमीन का विवाद खत्म करना था।
-ईश्वरी मिश्र, उद्यमी।
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प्रस्तावित उद्यम- चार
प्रिंटिंग प्रेस लगाने के लिए धोबहिया मिनी औद्योगिक आस्थान में जमीन आवंटित कराई थी। अब यहीं कार्य शुरू कराने की तैयारी चल रही थी। सोचा था कि बाउंड्रीवॉल होने के बाद अपने आवंटित भूखंड में निर्माण कराएंगे। तभी यहां की जमीन विवादों में फंस गई। अब उलझन बढ़ गई है। जिला उद्योग केंद्र के अधिकार से जमीन निकल गई तो हमारा सपना अधूरा रह जाएगा।
-जयप्रकाश गुप्ता, उद्यमी।
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औद्योगिक आस्थान धोबहिया की जमीन संबंधी विवाद को सुलझाने के लिए चार सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है। मैं स्वयं इसकी माॅनीटरिंग कर रही हूं। उम्मीद है कि जल्द ही प्रकरण का पटाक्षेप कर दिया जाएगा।
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-प्रियंका निरंजन, डीएम।
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