मोबाइल पर ज्यादा बात करना रिश्तों में पैदा कर रहा खटास
बस्ती। शादी के बाद मायके वालों की दखलंदाजी से कई बेटियों की गृहस्थी बसने के बजाय बर्बाद हो रही है। हर छोटी-छोटी बातों को लेकर मायके वालों की दखलंदाजी पतियों और उनके परिवार को रास नहीं आ रही है। वहीं, पति का बेरोजगार होना, शराब पीकर परिवार में झगड़े करना दंपतियों में दरार डाल रही है। मोबाइल पर लंबे समय तक बातचीत करने से भी पति-पत्नी के बीच न केवल मतभेद पैदा हो रहे हैं, बल्कि रिश्ते टूटने तक की नौबत आ रही है।
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पिछले महीनों में महिला थाने, थानों के महिला हेल्पडेस्क और परिवार परामर्श केंद्र में इस तरह एक हजार से ज्यादा मामले आ चुके हैं। जिसकी काउंसलिंग के दौरान पाया गया कि बेटियां मोबाइल फोन पर ससुराल की हर छोटी-बड़ी खबर मायके वालों को देना रिश्तों में दरार की वजह बन रही है। पारिवारिक बातों को साझा करने की वजह से उनका ससुराल वालों से आत्मीय रिश्ता बन ही नहीं पा राह है। मां के निर्देशों का पालन और सास के निर्देशों की अवहेलना बेटियों के घरौंदे टूटने का सबसे बड़ा कारण बन गई है।
केस- एक
शहर के एक मोहल्ले की रहने वाली राशिदा मां से लगातार फोन पर बातें करती थी। ससुराल की छोटी-छोटी बात अपनी मां को बताने लगी और उसकी सलाह पर चलने लगी। यहां तक कि खाना बनाने में भी वह हीलाहवाली करने लगी और मजबूरन बूढ़ी सास को खाना बनाना पड़ता था। ससुराल वालों ने उसे समझाया कि मायके वालों से इतनी बात करना ठीक नहीं है। लेकिन, उसने अनसुना कर दिया। मामला महिला थाने तक पहुंचा। वहां काउंसलिंग में जाकर राशिदा की आंख खुली।
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केस- दो
नगर थानाक्षेत्र की एक महिला ने कुछ माह पहले पुलिस में शिकायत दी। महिला का कहना था कि उसका पति हर समय झगड़ा और मारपीट करता है। पुलिस ने महिला के पति को बुलाया। पति ने जो तर्क दिया उससे पुलिस भी हैरान हो गई। पति का कहना है कि उसकी पत्नी हर समय फोन पर अपनी मां और बहन से बातें करती रहती है। उसे समय पर खाना भी नहीं देती, जब भी वह पत्नी से गृहस्थ जीवन को लेकर बात करता है तो उसकी पत्नी बात-बात पर अपने मायके पक्ष का उदाहरण देती है। मायके पक्ष भी बिना सोचे-समझे हर बात पर उनके गृहस्थ जीवन में दखल देते हैं। हालांकि पुलिस ने उनकी काउंसलिंग की जिससे घर बिगड़ने से बच गया।
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13 महीने में पांच सौ प्रार्थनापत्र
महिला थाने की थानाध्यक्ष भाग्यवती पांडेय का कहना है कि पिछले 13 महीने में पारिवारिक विवाद के साढ़े चार सौ प्रार्थनापत्र आए। जिनमें ज्यादातर मामले मायके वालों की दखल, पति के बेरोजगार होने, उसके शराब पीकर मारपीट करने और पति या पत्नी के मोबाइल पर ज्यादा बातचीत करने की वजह से पैदा हुए विवाद के हैं। इनमें काउंसलिंग करके तीन सौ मामलों में सुलह-समझौता कराया गया। पचास से अधिक मामलों में समझौते की गुंजाइश न होने पर मुकदमा दर्ज किया गया है। बाकी अभी काउंसलिंग की जा रही है।