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बिचौलियों के चंगुल में महिला अस्पताल

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बस्ती। वीरांगना रानी तलाश कुंवरि जिला महिला अस्पताल की व्यवस्था रामभरोसे हैं। यहां महिलाओं की जिंदगी बचाने के नाम पर उनके साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। परिसर में दिन भर कई आशा बहुएं और कथित आशा बहुएं घूमती रहती हैं। ये महिलाएं गर्भवती महिलाओं और उनके परिवार वालों को बहला फुसला कर निजी पैथोलॉजी और नर्सिंग होम पहुंचा रही हैं।
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महिला अस्पताल की व्यवस्था सुधारने की कोशिश कहीं भी कामयाब होती नहीं दिख रही हैं। आज भी परिसर में कई आशा बहुएं अपने निजी स्वार्थ के लिए सुबह से लेकर देर शाम तक चक्कर लगाती रहती हैं। इनसे अस्पताल में आने वाला हर शख्स परिचित है। यह अपने स्वार्थों के लिए अस्पताल की डॉक्टरों आदि से मिलकर गर्भवती महिलाओं को बहला फुसला कर निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी सेंटरों पर पहुंचा देती हैं।
पूर्व में एडी हेल्थ रहे जेपी पांडेय ने महिला अस्पताल में दलाली का कारोबार ठप कराने के लिए ओपीडी आदि कई जगहाें पर सीसीटीवी कैमरा लगाने और आशा बहुओं को परिचय पत्र के साथ ही अस्पताल में आने का फरमान जारी किया था। हालांकि यह काम उनके कार्यकाल में नहीं हो पाया, लेकिन बाद में सीसीटीवी कैमरे तो लग गए। मगर आशा बहुओं को परिचय पत्र के साथ अस्पताल में आने के लिए और रजिस्टर में उनके आने जाने और मकसद की एंट्री का कार्य आज तक नहीं हो पाया। वहीं पूर्व में सीएमओ रहे एसपी दोहरे ने भी परिसर में अनावश्यक रुप से घूमने वाली आशा बहुओं को फटकार लगाई थी। मगर बावजूद इसके इन पर अंकुश नहीं लगा। इस संबंध में अस्पताल की सीएमएस डॉ. सरोजबाला कहती हैं कि महिला अस्पताल में आशा बहुएं और कुछ आशा बहू के नाम पर फर्जी महिलाएं प्रसूताओं को बहलाने फुसलाने का काम कर रही हैं। इन पर अंकुश लगाने के लिए जिला और पुलिस प्रशासन सहित विभागीय अधिकारियों को पत्र लिखकर थक चुकी हूं। सख्ती करने पर ये लोग अभद्रता और मारपीट पर भी उतारू हो जाते हैं।
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अस्पताल में प्रसूताआें की सेहत का ख्याल नहीं
महिला अस्पताल में प्रसूताओं और उनके नवजातों को सुरक्षित रखने के समुचित इंतजाम नहीं हैं। ओपीडी और इमरजेंसी, लेबर रूम, ओटी के आसपास कई कुत्ते घूमते रहते हैं, मगर इनको हटाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।

वार्ड के अंदर और बाहर गंदगी
जनरल वार्ड में अंदर और बाहर गंदगी की भरमार है। यहां की सड़ांध से प्रसूताआें और नवजात शिशुओं में संक्रमण का खतरा है। कहीं-कहीं पानी जमा है। उसमें मच्छर भनभना रहे हैं।

नर्स और दाइयों पर लगते हैं आरोप
यहां की नर्सों और दाइयों पर आए दिन इलाज में अपने निजी स्वार्थ के लिए लापरवाही का आरोप लगता रहता है। मगर बावजूद इसके इनकी कार्यशैली में सुधार नहीं होता है। अभी बीते दिनों नगर थाने के अगई भगाड़ निवासी पिंटू सिंह ने अपनी पत्नी के टांके काटने के नाम पर परेशान करने और बाद में रुपये लेकर टांका काटने की शिकायत डीएम और सीएमएस से की थी। उसकी जांच अभी चल रही है। वहीं रात में आने वाली प्रसूताआें को बाहर भेजने को लेकर डीएम ने भी जल्द ही सीएमएस को फटकार लगाई थी।

अस्पताल के लोग ही दे रहे संरक्षण
अस्पताल में जगह-जगह महिला दलालों से सावधान का बोर्ड लगाकर प्रसूताओं और उनके परिवार वालों को सतर्क करने की नाकाम कोशिश की जाती है। मगर असलियत में इसका पालन इसलिए नहीं हो पाता, क्योंकि अस्पताल के लोग ही महिला दलालों का संरक्षण करते हैं। जानकारी के बाद भी सीएमएस प्रभावी कार्रवाई नहीं करती हैं।
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