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मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप की हुई अराधना

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बस्ती। चैत्र नवरात्र में चारों तरफ मां दुर्गा की अराधना हो रही है। घरों से लेकर मंदिरों में भक्ति की धारा बह रही है। हर तरफ मां भगवती के जयकारों की गूंज सुनाई दे रही है। बुधवार को साधकों को शीतलता प्रदान करने वाली देवी के रूप में माता चंद्रघंटा की आराधना की गई। विद्वानों का कहना है कि मां चंद्रघंटा का स्वभाव शांत और चंद्रमा की भांति कांतिमय है। मां चंद्रघंटा के सिर पर चंद्र और हस्त में घंटा है। इनकी दस भुजाएं हैं।
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इन दिनों देवी मंदिरों में भोर से ही भक्तों का तांता लग रहा है। पूजा की थाल लेकर छोटे बच्चों से लेकर बडे़ बूढे़ तक मां की पूजा में तल्लीन नजर आ रहे है। चारो ओर माहौल में धूप, दीप, फूल इत्र की सुगंध बिखर रही है। बुधवार को भी व्रत रखने के साथ गृहणियां कलश पूजन और फलाहार के इंतजाम में व्यस्त रहीं। पंडित दीपक शैलेंद्र चतुर्वेदी के मुताबिक, माता भगवती ने देवासुर संग्राम में घंटे की नाद से ही असुराें का नाश किया था। आह्वान, संकल्प और नाद के रूप में आराध्य यह देवी सरस्वती का रूप हैं। मां चंद्रघंटा नाद के साथ शांति का संदेश देती हैं। चंद्रमाजनित ग्रहों की शांति के लिए चंद्रघंटा देवी की आराधना अमोघ अस्त्र की तरह है। मन को शीतलता प्रदान करने वाली माता के रूप में जानी जाने वाली चंद्रघंटा देवी का पूजन चंद्रमा की दुर्बलता वाले जातकों के लिए सर्वोपरि माना गया है।

आज होगी मां कूष्मांडा की पूजा
बस्ती। नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की आराधना की जाएगी। पंडित दीपक उपाध्याय के अनुसार, मां कूष्मांडा की हंसी से ही इस ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई। अगर यह देवी खुश हो गईं तो जीवन में धन-दौलत की कभी कमी नहीं होगी। इस देवी की आठ भुजाएं हैं। इसलिए इन्हें अष्टभुजी देवी भी कहा जाता है। सात हाथों में कमंडल, धनुष-बाण, कमल का फूल, अमृत से भरा कलश, चक्र और गदा है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियाें और निधियों को देने वाली जप माला है। सिंह इनका वाहन है।
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