बस्ती। पहले गन्ने की वजह से रोना पड़ा अब किसानों को गेहूं की फसल के लिए रोना पड़ेगा। मौसम का तेवर किसानों की उम्मीदों पर पानी फेरने का काम कर रहा है। सूरज की तपिश गेहूं की बालियों को समय से पहले पकने को मजबूर कर रही है। नतीजन बालियों में ही गेहूं के दाने जल भुन जा रहे हैं। रही सही कसर पछुआ हवाओं का झोंका पूरा कर दे रहा है। मौसम का रुख देख किसान हताश नजर आ रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक 120 से 135 दिनों में पकने वाली गेहूं की प्रजातियों में 10 से 15 फीसदी पैदावार घट जाएगी। तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो किसानों को अगले कुछ ही दिन में कटाई मड़ाई शुरू करनी पड़ेगी।
मौसम अनुकूल होने के नाते इस बार गेहूं की रिकार्ड पैदावार होने की उम्मीद जताई गई थी। खेत में खड़ी लहलहाती फसल देखकर माना जा रहा था कि गेहूं का उत्पादन इस बार सभी रिकार्ड तोड़ देगा। मगर अंत आते आते बाजी पलटने वाली है। किसान के माथे पर चिंता की लकीरें साफ बता रही हैं कि वह मौसम के रूख से किस कदर परेशान है। मार्च माह के अंतिम सप्ताह से शुरू हुआ पछुआ हवा का झोंका रुकने का नाम नहीं ले रहा है। उस पर से सूरज की बढ़ती तपिश और परेशान कर रही है। जिस गेंहू की फसल को अभी 20 दिन बाद तैयार होनी थी वह खेतो में समय से पहले ही सूखकर कटाई का इंतजार कर रही है।
कृषि विज्ञान केंद्र बंजरिया के कृषि वैज्ञानिक डाक्टर एसएन सिंह के मुताबिक पछुआ हवा और तापमान में बढ़ोत्तरी के कारण गेहूं की फसल इस बार प्रभावित होगी। बीते मार्च माह से ही मौसम अप्रैल माह की तरह हो गया। सूरज की तपिश तो बढ़ी ही साथ में पछुआ हवा के तेज झोंको ने गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचाया है। बदले मौसम के चलते गेहूं की बालियों में दाने छोटे रह जाएंगे, पैदावार कम हो जाएगी। कहा कि जिन किसानों की फसल तैयार होने की कगार पर खड़ी है उसमें सिंचाई तभी करें जब तना अधिक लंबा न हो। अगर लंबे तने वाली फसल की सिंचाई कर दी जाएगी तो पछुआ हवा के वेग से फसल गिर जाएगी।