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दीपावली पर काव्य गोष्ठी का आयोजन

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बस्ती। दीपावली के पर्व पर रविवार को गौतम मुराली देवी बालिका इंटर कालेज गोटवा में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने अपने अपने अंदाज में दीवाली की व्याख्या की।
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काव्य गोष्ठी की शुरुआत डा.वीके वर्मा की पंक्तियों ‘दीवाली का आ गया यह स्वर्णिम त्यौहार, आओ हम सब ढ़हा दे नफरत की दीवार’ से हुई। लालमणि ने अपनी रचना कुछ यूं प्रस्तुत की-‘जग के अंधेरे को हर न सके,ऐसे दीपक जलाने से क्या फायदा’। इसके बाद बारी आई काव्य गोष्ठी का संचालन कर रहे कवि डा. रामकृष्ण लाल जगमग की। उन्होने ‘कहीं निविड़तम, कहीं है उजाला, कहीं है मुफलिसी, कहीं धन है काला’ रचना प्रस्तुत की। सत्येंद्र नाथ मतवाला ने अपनी रचना ‘दीवाली पर कीजिए अंधियारे का नाश, फैलाओ चारो तरफ जगमग दिव्य प्रकाश’ के जरिए लोगो को दीपो के पर्व की शुभकामनाएं दी। अध्यक्षता कर रहे रामदुलारे पाठक ने कहा कि कविता हमें मनुष्यता का दर्शन कराती है। डा. दशरथ प्रसाद यादव, सागर गोरखपुरी, कृष्णा श्रीवास्तव, जय प्रकाश गोस्वामी,, पल्टूराम वर्मा, बाबूराम वर्मा आदि ने भी काव्यगोष्ठी में अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।
इस मौके पर रामचंद्र लाल श्रीवास्तव, टब्दुल कादिर, मुन्नी लाल, रामकुमार, दीपक प्रसाद, डा. भाष्कर शर्मा, डा. जेपी चौधरी, डा. राजेश वर्मा, रितेश चौधरी, लालजी यादव आदि मौजूद रहे।‘किसी की दीवाली, किसी का दिवाला’
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दीपावली पर्व पर काव्य गोष्ठी का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। दीपावली के पर्व पर रविवार को गौतम मुराली देवी बालिका इंटर कालेज गोटवा में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने अपने अपने अंदाज में दीवाली की व्याख्या की।
काव्य गोष्ठी की शुरुआत डा.वीके वर्मा की पंक्तियों ‘दीवाली का आ गया यह स्वर्णिम त्यौहार, आओ हम सब ढ़हा दे नफरत की दीवार’ से हुई। लालमणि ने अपनी रचना कुछ यूं प्रस्तुत की-‘जग के अंधेरे को हर न सके,ऐसे दीपक जलाने से क्या फायदा’। इसके बाद बारी आई काव्य गोष्ठी का संचालन कर रहे कवि डा. रामकृष्ण लाल जगमग की। उन्होने ‘कहीं निविड़तम, कहीं है उजाला, कहीं है मुफलिसी, कहीं धन है काला’ रचना प्रस्तुत की। सत्येंद्र नाथ मतवाला ने अपनी रचना ‘दीवाली पर कीजिए अंधियारे का नाश, फैलाओ चारो तरफ जगमग दिव्य प्रकाश’ के जरिए लोगो को दीपो के पर्व की शुभकामनाएं दी। अध्यक्षता कर रहे रामदुलारे पाठक ने कहा कि कविता हमें मनुष्यता का दर्शन कराती है। डा. दशरथ प्रसाद यादव, सागर गोरखपुरी, कृष्णा श्रीवास्तव, जय प्रकाश गोस्वामी,, पल्टूराम वर्मा, बाबूराम वर्मा आदि ने भी काव्यगोष्ठी में अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।
इस मौके पर रामचंद्र लाल श्रीवास्तव, टब्दुल कादिर, मुन्नी लाल, रामकुमार, दीपक प्रसाद, डा. भाष्कर शर्मा, डा. जेपी चौधरी, डा. राजेश वर्मा, रितेश चौधरी, लालजी यादव आदि मौजूद रहे।बस्ती। दीपावली के पर्व पर रविवार को गौतम मुराली देवी बालिका इंटर कालेज गोटवा में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने अपने अपने अंदाज में दीवाली की व्याख्या की।
काव्य गोष्ठी की शुरुआत डा.वीके वर्मा की पंक्तियों ‘दीवाली का आ गया यह स्वर्णिम त्यौहार, आओ हम सब ढ़हा दे नफरत की दीवार’ से हुई। लालमणि ने अपनी रचना कुछ यूं प्रस्तुत की-‘जग के अंधेरे को हर न सके,ऐसे दीपक जलाने से क्या फायदा’। इसके बाद बारी आई काव्य गोष्ठी का संचालन कर रहे कवि डा. रामकृष्ण लाल जगमग की। उन्होने ‘कहीं निविड़तम, कहीं है उजाला, कहीं है मुफलिसी, कहीं धन है काला’ रचना प्रस्तुत की। सत्येंद्र नाथ मतवाला ने अपनी रचना ‘दीवाली पर कीजिए अंधियारे का नाश, फैलाओ चारो तरफ जगमग दिव्य प्रकाश’ के जरिए लोगो को दीपो के पर्व की शुभकामनाएं दी। अध्यक्षता कर रहे रामदुलारे पाठक ने कहा कि कविता हमें मनुष्यता का दर्शन कराती है। डा. दशरथ प्रसाद यादव, सागर गोरखपुरी, कृष्णा श्रीवास्तव, जय प्रकाश गोस्वामी,, पल्टूराम वर्मा, बाबूराम वर्मा आदि ने भी काव्यगोष्ठी में अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।
इस मौके पर रामचंद्र लाल श्रीवास्तव, टब्दुल कादिर, मुन्नी लाल, रामकुमार, दीपक प्रसाद, डा. भाष्कर शर्मा, डा. जेपी चौधरी, डा. राजेश वर्मा, रितेश चौधरी, लालजी यादव आदि मौजूद रहे।
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