बस्ती। खाद्य विभाग के परशुरामपुर केंद्र पर डीएसओ ने छापा मारकर 50 लाख रुपये से अधिक मूल्य के गेहूं, चावल व चीनी की चोरी पकड़ी है। छापेमारी में लगभग 4800 कुंटल अनाज और चीनी गोदाम से गायब मिले। इस मामले में दो व्यक्तिओं के विरुद्ध धारा 3/7 के तहत के केस दर्ज हुआ है। यह कार्रवाई डीएम के आदेश पर की गई है।
प्राथमिक जांच करने गए डीएसओ पूरन सिंह को परशुरामपुर केंद्र पर कुछ भी ठीक नहीं मिला। उन्होंने जब गोदाम में रखे अनाज का सत्यापन शुरू किया तो लाखों रुपये के अनाज गायब मिले। डीएसओ ने बताया कि सत्यापन के समय गोदाम प्रभारी अरुण कुमार श्रीवास्तव मौजूद रहे। उनके बताए स्टॉक की गिनती की गई तो 10535 बोरी गेहूं में 5149 बोरियां कम मिलीं। चावल की 3698 बोरियां कम पाई गईं। इसी तरह चीनी के स्टाक 2358 बोरी में 974 बोरी चीनी गायब मिली। इस प्रकार 2500 कुंटल गेहूं, 1800 कुंटल चावल और 487 कुंटल चीनी का स्टाक गोदाम में नहीं मिला। डीएसओ ने जब गोदाम प्रभारी से इतनी बड़ी मात्रा में अनाज और चीनी गायब होने का कारण पूछा तो वह बगलें झांकने लगे। गोदाम प्रभारी को डीएम के सामने लाया गया। वहां पर प्रभारी ने लिखित बयान में यह स्वीकारा कि वह पिछले कई महीनों से बीमार हैं। आंख से कम दिखाई देता है, गुर्दा भी खराब हो चुका है। बताया कि उनकी अनुपस्थिति में पप्पू पांडेय और गुलाब चंद्र शुक्ल नामक बाहरी व्यक्ति गोदाम का संचालन कर रहे थे। कहा कि गोदाम से जो भी अनाज और चीनी की चोरी हुई है, उसके लिए वही दोनों व्यक्ति जिम्मेदार हैं। इसी बयान के आधार पर डीएम एस. मथुशालिनी ने दोनों व्यक्तियों के विरुद्ध धारा 3/7 ईसी एक्ट के तहत मुकदमा कराने का आदेश दिया। गोदाम प्रभारी की ओर से परशुरामपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
सवालों के घेरे में विभाग
गोदाम प्रभारी के लिखित बयान ने खाद्य विभाग को कठघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या किसी बाहरी आदमी को करोड़ों रुपये का सरकारी अनाज सौंपा जा सकता है। इस गोदाम की पहले भी अनेक शिकायतें हो चुकी हैं। ऐसा भी नहीं है कि इसकी जानकारी विभाग के जिम्मेदारों को न रही हो। उपभोक्ताओं की मानें तो इसके लिए विभाग के ही कुछ लोग जिम्मेदार हैं। अब इस मामले में कोई भी अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है।
व्यवस्था परिवर्तन के चलते पकड़ी गई चोरी
डीएसओ कहते हैं कि पहले गोदामों पर अनाज का प्रथम स्तर पर सत्यापन बीडीओ के जिम्मे था। शिकायत मिलने पर डीएम ने व्यवस्था में परिवर्तन करते हुए प्रथम स्तर पर सत्यापन की जिम्मेदारी एसडीएम को सौंपी। एसडीएम की अनुपस्थिति में सत्यापन डीएसओ को करना है। कहते हैं कि व्यवस्था परिवर्तन का ही परिणाम है कि इतनी बड़ी मात्रा में अनाज की चोरी का खुलासा हुआ।