.. तो बर्बाद हो जाता तीन हजार क्विंटल धान
मंडी यार्ड में रखा गया धान
आग से बचाव के यहां नहीं हैं इंतजाम
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। मंडी में रविवार को हुई आग लगने की घटना में जहां कारोबारियों के लाखों रुपये मूल्य के सामान जल गए, वहीं मंडी यार्ड में रखे तीन हजार क्विंटल धान तक आग की आंच पहुंचने से जिम्मेदार सकते में आ गए थे। संयोग ही था कि आग पर समय से काबू पा लिया गया, वरना आग फैलने पर यहां रखा धान भी आग में जल सकता था, क्योंकि यार्ड में आग से बचाव के इंतजाम तक नहीं हैं।
हाईवे पर स्थित मंडी यार्ड में धान खरीद के चार केंद्र हैं। इनमें दो खाद्य विभाग, एक एफसीआई व एक पीसीएफ का केंद्र संचालित है। इसके अलावा यहां अनाज खरीद का काम निजी व्यापारी भी करते हैं, जिनका मंडी में रजिस्ट्रेशन है। निजी व्यापारियों के धान का कोई आंकड़ा तो नहीं है, मगर सरकारी धान क्रय केंद्रों पर उस समय तकरीबन तीन हजार क्विंटल धान भंडारित था। इधर मंडी में आग लगी तो केंद्र प्रभारियों की बेचैनी बढ़ गई। क्योंकि जिस दिन यह घटना हुई वहां चौकीदार के अलावा कोई मौजूद नहीं था। यदि आग फैल जाती तो यहां रखा धान बर्बाद हो सकता था। वैसे भी यहां आग से बचाव के इंतजाम नहीं हैं।
डिप्टी आरएमओ गोरखनाथ तिवारी कहते हैं कि मंडी में जिस समय आग लगी, वहां करीब तीन हजार क्विंटल धान रखा था। अवकाश के चलते किसी भी विभाग का कोई अधिकारी व कर्मचारी मौके पर मौजूूद नहीं था। केवल चौकीदार व पल्लेदार ही वहां थे, जो धान को व्यवस्थित करने में लगे थे। गनीमत थी कि आग यहां तक नहीं पहुंची, वरना नुकसान ज्यादा हो सकता था। इस घटना के बाद से मंडी के अधिकारियों को आग से बचाव के इंतजाम के लिए कहा गया है। खुद भी केंद्र प्रभारी पानी व बालू की व्यवस्था सहित आग बचाव के अन्य इंतजाम में लगे हैं।