गबन की जांच करने में जांच अधिकारी तेजी नहीं दिखा रहे हैं। दो साल हो जाते हैं, मगर न तो जांच की जाती है, और न कारण ही बताया जाता है। जांच अधिकारियों की इस लापरवाही का फायदा जहां सरकारी धन का बंदरबांट करने वाले उठाते हैं, वहीं शिकायतकर्ता को धमकी मिलती है। इसी तरह का एक मामला हर्रैया ब्लॉक के ग्राम पंचायत सहसरावं का सामने आया है। एक साल बीत गए मगर जांच अधिकारी डीपीआरओ शिवशंकर सिंह और जेई एपी मिश्र ने जांच रिपोर्ट ही नहीं दी, जिसके चलते सीडीओ ने दोनों को चेतावनी जारी कर एक हजार रुपये का जुर्माना लगाने को कहा है।
ब्लॉक हर्रैया के ग्राम पंचायत सहसरावं के प्रेम प्रकाश वर्मा ने ग्राम्य आयुक्त को पत्र लिखकर मनरेगा के धन का दुरूपयोग करने वालों के विरुद्घ कार्रवाई करने और धन की रिकवरी करने की मांग लगभग एक साल पहले की गई। इसके लिए स्थानीय स्तर पर डीपीरआरओ और जेई को संयुक्त रूप से जांच अधिकारी बनाया और तीन में रिपोर्ट देने का निर्देश हुआ, तीन दिन कौन कहे साल भर में भी जांच रिपोर्ट नहीं दी गई। शिकायतकर्ता का का कहना है कि सरकारी धन का बंदरबांट करने वाले दोषियों को बचाया जा रहा है। सीडीओ दोनों को चेतावनी जारी करते हुए तीन दिन में शिकायतकर्ता के बयान के साथ जांच आख्या देने का निर्देश दिया है।